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संघ को नहीं समझने वाले एवं विरोध करने वाले भी करीब आकर खड़े हो रहे: डॉ. गोपाल

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जम्मू। राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ (आरएसएस) के सर कार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले और सह सर कार्यवाह डॉ. कृष्ण गोपाल व अन्य पदाधिकारियों ने बुधवार को विजयदशमी पर वेद मंदिर मैदान पर शस्त्र पूजन किया। मुख्य वक्ता के तौर पर डॉ. कृष्ण गोपाल ने स्वंय सेवकों को संबोधित भी किया। उन्होंने जम्मू-कश्मीर में नया दौर संघ के अनुकुल बताया। कहा कि संघ को नहीं समझने वाले एवं विरोध करने वाले भी करीब आकर खड़े हो रहे हैं। उन्होंने अपने संबोधन में संघ की स्थापना के उद्देश्य, हिंदू दर्शन और हिंदुत्व की विस्तार से व्याख्या की। इस अवसर पर सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले, प्रांत संघचालक डॉ. गौतम मैंगी और जम्मू विभाग संघचालक सुरेश चंद्र भी उपस्थित थे।
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सह सर कार्यवाह डॉ. कृष्ण गोपाल ने कहा कि विजयदशमी के साथ इतिहास की घटनाएं जुड़ी हुई हैं। पुरातन काल में भी जब दुष्ट प्रभावी हुए तब सज्जन लोगों ने एकत्र होकर संघर्ष किया। इससे दिव्य शक्तियां उत्पन्न हुईं। देव और असुर शक्ति में भी संघर्ष हुआ। ऐसे प्रसंग समय-समय पर आएंगे तो सज्जन लोगों को एकत्र होना पड़ेगा। जब रावण जैसी शक्ति प्रभावी हुई तो भगवान श्री राम अवतरित हुए। इसलिए आसुरी शक्तियों के विनाश से ही विकास का रास्ता साफ होगा।
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की स्थापना के संदर्भ में उन्होंने कहा कि 3000 वर्षों के इतिहास में भारत की विश्व में आर्थिक, व्यापारिक और शिक्षा क्षेत्र में खासी ख्याति एवं प्रतिष्ठा थी। उन्होंने कहा कि आज के दिन विजयादशमी के अवसर पर 1925 में डॉ. हेडगेवार ने समर्थ हिंदू समाज के संगठन के लिए संघ की स्थापना की थी। 97 वर्ष बीत गए और शाखाओं की संख्या बढ़ती गई। संघ को नहीं समझने वाले एवं विरोध करने वाले भी निकट आकर साथ खड़े हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि संघ की 97 वर्ष की दीर्घकालीन यात्रा में हमें कष्ट झेलने पड़े हैं। इसके बावजूद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ एक शक्ति के साथ खड़ा है। हमारा संकल्प सनातन है कि भारत एक हिंदू राष्ट्र है।
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डॉ. कृष्ण गोपाल ने कहा कि लोग हिंदू दर्शन और हिंदुत्व को इसलिए नहीं समझ पाते क्योंकि वह इसे पाश्चात्य चश्मे से देखते हैं। वह भ्रम में फंस जाते हैं। हिंदू दर्शन और हिंदुत्व विचारों को साथ लेकर चलता है। कार्यक्रम में जम्मू महानगर के स्वयंसेवकों ने पूर्ण गणवेश में हिस्सा लिया।
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