जम्मू। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट का मानना है कि संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन के साथ सशस्त्र बलों की तैनाती की तुलना गठित पुलिस इकाइयों के साथ नहीं की जा सकती क्योंकि दोनों ने संयुक्त राष्ट्र के जनादेश के अनुसार अलग-अलग भूमिका निभाई है।
भारत सरकार द्वारा बनाई गई नीति में प्राप्त किए जाने वाले उद्देश्यों के साथ उचित वर्गीकरण है और कानून तय किया गया है कि सरकार के नीतिगत निर्णय न्यायिक समीक्षा के लिए अतिसंवेदनशील नहीं हैं। इन दलीलों के साथ मामले से संबंधित याचिका को न्यायाधीश वसीम नरगल ने खारिज कर दिया।
वर्ष 2006 में सरकार ने एक आदेश जारी कर आईटीबीपी के जवानों के लिए ओवरसीज अलाउंस को मंजूरी दी थी। इसमें अधिकारियों को यूएन मिशन पर जाने के लिए प्रति माह 2120 यूएस डालर और सहयोगी स्टाफ को प्रति माह 1600 डालर देने की मंजूरी दी थी। अन्य रैंक के लिए 925 डालर देने की मंजूरी दी गई थी। इस आदेश को रद्द करने की मांग संबंधी याचिका राजिंदर सिंह सैनी एवं अन्य ने दायर की थी। न्यायाधीश ने कहा कि हाईकोर्ट सरकार के नीतिगत फैसलों में हस्तक्षेप नहीं कर सकता। इन दलीलों के साथ याचिका को खारिज कर दिया।