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प्रदेश में अगले तीन साल में दोगुनी होगी बिजली क्षमता

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जम्मू। जम्मू-कश्मीर में 3500 मेगावाट की मौजूदा क्षमता को अगले 3 वर्षों में दोगुना किया जाएगा। इसके लिए 34,882 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इस दिशा में 5 मेगा जल विद्युत परियोजनाएं जैसे रतले (824 मेगावाट), किरथाई-द्वितीय (930 मेगावाट), सावलकोट (1856 मेगावाट), दुलहस्ती-चरण-2 (258 मेगावाट) और उरी-चरण 1 चरण-2 (240 मेगावाट), 4134 मेगावाट की कुल क्षमता को एनएचपीसी के सहयोग से पूरा किया जाएगा।
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वर्तमान में 2000 करोड़ रुपये की वितरण परियोजनाएं पूरी की गई हैं, जबकि सब-ट्रांसमिशन और वितरण नेटवर्क को मजबूत करने के लिए 6000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि आवंटित की गई है। इससे शहरों और गांवों के बीच बुनियादी ढांचागत अंतर को पाटने में मदद मिलेगी। अगस्त 2019 के बाद से अब तक 2451 मेगावाट बिजली बढ़ाई गई, जबकि इससे पहले 70 सालों में 8394 एमवीए बिजली प्राप्त की गई।
सरकारी प्रवक्ता का कहना है कि सरकार के दृढ़ प्रयास ने सुनिश्चित किया है कि जम्मू-कश्मीर का प्रत्येक नागरिक मौसम की अनिश्चितता और कठिन इलाके के बावजूद बिजली के सपने को साकार करे। यूटी प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया है कि आम नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण सड़कें, बिजली और पानी की सुविधा प्राथमिकता के आधार पर मिले। प्रशासन का उद्देश्य सभी नागरिकों और व्यवसायों को गुणवत्तापूर्ण बिजली प्रदान करना है और ये संवर्धित सुविधाएं बढ़ती अर्थव्यवस्था की महत्वपूर्ण आवश्यकता को पूरा करेंगी। वर्तमान बिजली घाटे को दूर करने के लिए जम्मू-कश्मीर ने बड़े पैमाने पर क्षमता वृद्धि कार्यक्रम शुरू किया है।
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मौजूदा प्रशासन लंबे समय से लटके सभी प्रोजेक्टों को रिकॉर्ड समय में पूरा कर रहा है। जम्मू और कश्मीर को एक अनुमानित जल-विद्युत क्षमता प्रदान की गई है, जिसमें से 14,867 मेगावाट की पहचान केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण द्वारा की जा चुकी है। विशेष रूप से प्रधानमंत्री सहज बिजली हर घर योजना ‘सौभाग्य’ के तहत एक बड़ा मील का पत्थर हासिल किया, जिसमें केंद्र शासित प्रदेश ने ग्रामीण विद्युतीकरण के 100 प्रतिशत लक्ष्य को पूरा किया। प्रशासन ने हर गांव में विद्युतीकरण सुनिश्चित करने के लिए सक्रिय रूप से काम किया है, जो इस तथ्य से स्पष्ट है कि पूरे केंद्र शासित प्रदेश में लगभग 3,57,405 घरों का विद्युतीकरण किया गया है। समय से पहले 100 फीसदी विद्युतीकरण के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए जम्मू-कश्मीर को भारत सरकार से 100 करोड़ रुपये का पुरस्कार भी मिला है।
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