केसर की खेती के लिए जम्मू-कश्मीर और सिक्किम तकनीक साझा करेंगे। इसके लिए कृषि विभाग, सिक्किम सरकार और सिक्कम विवि के बीच केसर के लिए प्रशिक्षण, प्रौद्योगिकी, क्षमता निर्माण और विस्तार गतिविधियों पर सहयोग के लिए त्रिपक्षीय समझौता हुआ। इस दौरान उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा कि इस समझौते से कृषि और बागवानी क्षेत्र के विकास को ज्यादा बढ़ावा मिलेगा। इस मौके पर सिक्किम के राज्यपाल गंगा प्रसाद भी मौजूद रहे।
सिक्किम के राज्यपाल गंगा प्रसाद ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के कृषि विभाग, सिक्किम सरकार और सिक्किम विश्वविद्यालय ने कृषि-बागवानी क्षेत्र में एक नई साझेदारी की शुरुआत की है। यह समझौता केसर की खेती और अन्य फसलों के विविध पहलुओं की बेहतर समझ पैदा करने में सहायक सिद्ध होगा। सिक्किम में केसर उत्पादन के प्रयासों को एक नई दिशा मिलेगी।
उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा कि अनुसंधान और तकनीकी हस्तक्षेप मूल्यवर्धन और आपूर्ति श्रृंखला के बुनियादी ढांचे में अंतराल को कम करेगा। फसल तैयार होने के बाद नुकसान को कम करने में मदद मिलेगी। सिक्किम भारत का पहला जैविक राज्य होने के कारण जैविक उत्पादन प्रौद्योगिकी और प्रमाणन में विशेषज्ञता रखता है। उपराज्यपाल ने कहा कि समझौते से जम्मू-कश्मीर को जैविक किसानों के लिए समाधान और नीतिगत नुस्खे प्रदान करने में काफी मदद मिलेगी। ज्ञान का आदान-प्रदान, तकनीकी हस्तक्षेप से आर्थिक स्थिरता को बढ़ावा मिलेगा। उपराज्यपाल ने कृषि में सुधार लाने और कृषक समुदाय को अधिकतम लाभ प्रदान करने के लिए केंद्र शासित प्रदेश सरकार के पिछले दो वर्षों के दौरान किए गए प्रयासों पर प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि कृषि जम्मू-कश्मीर की अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार है। 70 फीसदी आबादी इस पर निर्भर है। इस साल के बजट में कृषि के लिए 2835 करोड़ रुपये और बागवानी क्षेत्र के लिए 646 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। डेयरी और भेड़ पालन के विकास के लिए अलग से 392 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। आने वाले समय में जबरदस्त बदलाव आएगा। इस अवसर पर सिक्किम में केसर के अध्ययन और खेती पर एक पावरपॉइंट प्रस्तुति दी गई।