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सीटी बजाकर किया सतर्क, पर 5 मिनट में ही सब कुछ तबाह

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जम्मू। चंडीगढ़ के मनीष चौहान अपने चार अन्य साथियों प्रदीप राणा, संगम सिंह, हरदीप राणा व ठाकुर के साथ बाबा भोले के दर्शन के लिए बालटाल के रास्ते शुक्रवार को पवित्र गुफा पहुंचे थे। मनीष ने बताया कि शाम को दर्शन के बाद हम पांचों लोग गुफा के बाहर ही लगे करनाल वालों के लंगर में खाना खाने लगे। खाना खाकर बाहर निकले थे और पांच मिनट का समय ही बीता होगा कि तबाही का उफान शुरू हो गया। उस समय लंगर में 40-50 भक्त और लगभग 20 कारीगर-मजदूर रहे होंगे। देखते ही देखते पूरा लंगर बह गया। किसी को बचने तक का मौका नहीं मिला। आशंका जताई कि इस लंगर में रहने वाले श्रद्धालुओं को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा है। बताया कि सीआरपीएफ के एक जवान ने एक महिला को तो बचा लिया लेकिन लगभग 22 साल की बेटी को नहीं बचाया जा सका। मनीष के साथी प्रदीप और हरदीप ने बताया कि गुफा के बगल से चूने के रंग का गाद और मलबा तेज बहाव के साथ नीचे आने लगा। पूरा मलबा हेलीपैड तक पसर गया है। वहां तैनात जवानों ने सीटी बजाकर तथा शोर मचाकर लोगों को सचेत किया तब जाकर कई जानें बच सकीं। कुछ लोगों ने नीचे भागकर तो कईयों ने ऊपर की ओऱ भागकर जान बचाई।
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प्रशासन के बेहतर प्रबंध, पंजतरणी में टेंट किया मुफ्त
चंडीगढ़ इन युवाओं ने बताया कि सुरक्षा बलों ने सभी भक्तों को रात में पंजतरणी भेज दिया। यहां प्रशासन ने बेहतरीन प्रबंध कर रखे थे। लंगर तथा निजी टेंट वालों ने भी जी खोलकर यात्रियों का आतिथ्य किया। उन्होंने बताया कि पंजतरणी में सभी लंगर मुफ्त कर दिए गए थे। टेंट वालों ने कई यात्रियों जिनके बैग वगैरह बह गए थे उनके लिए कपड़े का बंदोबस्त किया। कइयों के फोन भी छूट गए थे।
बिजली कड़की और भयानक मंजर
बालटाल पहुंचे एक अन्य यात्री शुभम गर्ग ने बताया कि शाम को बारिश थम गई थी तभी भयावह मंजर शुरू हो गया। उनका कहना है कि बादल फटने जैसी कोई बात नहीं है, बल्कि पवित्र गुफा के ऊपर के तीन में से एक झील के फटने से पूरा सैलाब नीचे चला आया। देखते ही देखते लोग आंखों के सामने बहते नजर आए। एक जवान भी बहता दिखा। हर कोई बेबस बना हुआ था। कोई मदद नहीं कर पा रहा था। उनका कहना था कि ऐसा मंजर पहले उन्होंने कभी नहीं देखा था। एक अन्य यात्री ने बताया कि बिजली कड़की और बर्बादी सामने दिखने लगी। किसी को संभलने तक का मौका नहीं मिला, लेकिन सुरक्षा बलों के जवानों ने भरपूर मदद की।
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