जम्मू। सेना में अग्निपथ योजना को एकदम से लागू करने पर सेना के पूर्व अफसरों ने भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने इस योजना को युवाओं के लिए बड़ा झटका बताया है। उनका कहना है कि योजना में कोई बुराई नहीं है, लेकिन इसे लागू करने में जल्दबाजी की गई है। पहले इसका ट्रायल होना चाहिए था। इससे न सिर्फ युवाओं का मनोबल टूटेगा बल्कि सेना का भी हौसला कमजोर पड़ेगा। सरकार को चाहिए कि जिन अग्निवीरों को चार साल बाद सेवानिवृत्त किया जाना है, उन्हें अर्द्धसैनिक बलों में तैनात किया जाए।
95 साल की आयु में मैंने योजना को ऐसे लागू होते नहीं देखा। योजना में कोई बुराई नहीं है, लेकिन इसे लागू करने में जल्दबाजी की गई है। सरकार को चाहिए था कि इसे लेकर पहले ट्रायल किया जाता। दो साल से कोरोना महामारी के चलते कोई भर्ती नहीं हुई है। युवा उम्मीद कर रहे थे कि अब भर्ती होगी। ऐसे में इस तरह का अचानक फैसला करना और इसे लागू करना युवाओं के सपनों को तोड़ने जैसा है। इतना बड़ा बदलाव ऐसे नहीं होना चाहिए। पहले इसका ट्रायल होना चाहिए था, यदि सफल होते तो लागू कर देते। इससे सेना पर भी असर पड़ेगा। सरकार को चार साल बाद रिटायर किए जाने वाले 75 फीसदी युवाओं को अर्द्धसैनिक बलों में तैनात किया जाना चाहिए।
-गोवर्धन जमवाल, सेवानिवृत्त जनरल
इस योजना को लागू करने में जल्दबाजी की गई है। इसकी जिम्मेदार सरकार और अफसरशाही है। योजना लागू करने से पहले सेना के पूर्व अफसरों से बात की जानी चाहिए थी। इसे ट्रायल के तौर पर चलाया जाता। चार साल के बाद सेवानिवृत्त किए जाने वाले युवाओं के लिए अर्द्र्धसैनिक बलों में 10 फीसदी आरक्षण लागू होना चाहिए या फिर सबको वहां तैनात किया जाता। सरकार अपने पेंशन बिल को कम करना चाहती है। यदि सरकार सेना का खर्च नहीं उठा सकती तो सेना की जरूरत क्या है। ऐसे तो कोई जंग नहीं जीत सकते। सरकार को इस योजना के बारे में सोचना होगा।
-वीके साही, सेवानिवृत्त कर्नल
यह योजना बिना सोचे समझे लागू की जा रही है, जो देश के युवाओं और सेना के साथ भद्दा मजाक है। इस समय ऐसे फैसले लेना खतरनाक साबित हो सकता है, जब पाकिस्तान और चीन जैसे पड़ोसी मुल्क हैं। सरकार को चाहिए कि सेना में चार साल की नौकरी के बाद अग्निवीरों को अन्य बलों में नियुक्त किया जाए। यह योजना देश के युवाओं और सेना दोनों को कमजोर कर देगी। यदि सरकार को पैसे ही बचाने हैं तो कहीं ओर से बचाए।
-अनिल घौर, रक्षा विशेषज्ञ