जम्मू। जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर रामबन जिले में निर्माणाधीन सुरंग तीन किलोमीटर लंबी बननी है। खूनी नाला से मगरकोट तक सुरंग का निर्माण किया जाना है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के आधिकारिक सूत्रों के अनुसार सुरंग के लिए निर्माण कंपनी ने पहाड़ की खुदाई का अभी काम शुरू किया था कि पहाड़ से मलबा गिरने से हादसा हो गया।
उल्लेखनीय है कि जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर एशिया की सबसे लंबी नौ किलोमीटर की हाइवे सुरंग भी है। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नाम से इस सुरंग का लोकार्पण 2015 में हुआ था। इसके अलावा साढ़े आठ किलोमीटर लंबी बनिहाल-काजीगुंड सुरंग के अलावा नंदिनी में दो सुरंगें व जवाहर टनल भी हैं। वहीं कई सुरंगों का निर्माण किया जाना प्रस्तावित है। इनमे पंथेयाल में सुरंग का निर्माण कार्य अंतिम चरण में चल रहा है और पंथेयाल में ही एक ओर सुरंग का निर्माण किया जाना है। कैफेटेरिया मोड़ में भी दो सुरंगों का निर्माण प्रस्तावित है। इसके अलावा मगरकोट में छह किलोमीटर लंबा पुल भी प्रस्तावित है।
क्षेत्रीय अधिकारी रोहिन गुप्ता का कहना है कि जिस सुरंग के निर्माण की शुरूआत में हादसा हुआ है, वह तीन किलोमीटर लंबी बननी है।
निर्माणाधीन सुरंगो का हो सुरक्षा आडिट: फिरदौस
विधान परिषद के पूर्व सदस्य एवं पीडीपी प्रवक्ता फिरदौस टाक ने रामबन जिले में खूनी नाला के करीब सुरंग के निर्माण के दौरान पहाड़ से मलबा गिरने से कई श्रमिको के दबने की घटना पर दुख जताया है। उन्होंने निर्माणाधीन सुरंगों का सुरक्षा ऑडिट करवाए जाने पर जोर दिया। उनका कहना है कि जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग हो या चिनाब घाटी, वहां पर सड़क, बिजली और रेल परियोजनाओं में पहाड़ खोदने का काम कई जगह चल रहा है। निर्माण कंपनियां श्रमिकों की सुरक्षा की अनदेखी कर रही हैं। ऐसे में श्रमिकों के मलबे के नीचे दबने के हादसे हो रहे हैं। सरकार को निर्माणाधीन सुरंगों का सुरक्षा ऑडिट तत्काल करवाना चाहिए।