जम्मू। बिहार से 25 साल पहले जम्मू काम करने आए श्रमिक मुकेश आज अन्य श्रमिकों के लिए प्रेरणा बन गए हैं। वह साथी श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध कराने और उन्हें श्रम विभाग की योजनाओं का लाभ दिलाने और जागरूक करने में लगे हैं। कभी राज मिस्त्री का काम करने वाले मुकेश ने साल 2008 में मार्बल वर्कर यूनियन नामक संस्था बनाई थी। इसमें निर्माण कार्य से जुड़े दस हजार से अधिक श्रमिकों को जोड़ा और उनके कल्याण के लिए काम करना शुरू किया। मुकेश के इस प्रयास को श्रम विभाग ने भी सराहा।
मुकेश ने कहा कि एक श्रमिक का जीवन जोखिम और चुनौतियां से घिरा रहता है। अब लोगों और सरकार की सोच श्रमिकों के लिए बदलने लगी है। 2008 में मार्बल वर्कर यूनियन बनाने का उद्देश्य अपने लोगों को जागरूक करना था, ताकि निर्माण कार्य में जो परेशानी उन्होंने झेली, उसे कोई और न झेले। संस्था को श्रम विभाग के साथ पंजीकृत करने के बाद अपने साथियों को श्रम अधिकारों के प्रति जागरूक किया। केंद्र और प्रदेश सरकार की श्रम कल्याण योजनाओं से अछुते श्रमिकों को उसका लाभ दिलवाया। श्रम कार्ड, ई-श्रम कार्ड सहित अन्य योजनाओं में श्रमिकों को पंजीकृत किया। उन्होंने कहा कि सरकार से मिली मदद से बच्चों को अच्छी शिक्षा दे पाए हैं। शिक्षा के लिए मिली वित्तीय मदद से आज हमारे बच्चे मेडिकल और इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे हैं। सरकारी की योजनाओं के प्रति श्रमिकों का जागरूक नहीं होना सबसे बड़ी परेशानी है।
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जम्मू-कश्मीर में दो साल में 2.9 लाख श्रमिक हुए पंजीकृत
जम्मू-कश्मीर भवन एवं अन्य निर्माण श्रमिक कल्याण बोर्ड के साथ दो वर्षों में 2.9 लाख नए श्रमिक पंजीकृत हुए। बोर्ड के साथ पहले 1.60 लाख श्रमिक पंजीकृत थे, जिनकी संख्या अब बढ़कर 4.50 लाख हो गई है। बोर्ड ने इस वर्ष चार लाख श्रमिकों के बच्चों को शिक्षा छात्रवृत्ति देने का फैसला लिया है, जो पहले दो लाख बच्चों को ही दी जाती थी।
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जम्मू जिले में 2.97 लाख ई-श्रम कार्ड बने
श्रम विभाग ने असंगठित क्षेत्र के 2.97 लाख श्रमिकों के ई-कार्ड बनाए हैं। ये संख्या अन्य जिलों के मुकाबले काफी अधिक है। केंद्र सरकार ने पिछले वर्ष असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकृत करने को कहा था।