जम्मू। उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के प्रमुख सचिव रंजन प्रकाश ठाकुर ने शुक्रवार को नई दिल्ली से यूरोप के लिए जीआई प्रमाणित हाथ से निर्मित कश्मीरी रेशमी कालीनों की पहली खेप को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह भौगोलिक संकेतक (पंजीकरण व संरक्षण) अधिनियम 1999, 2016 के तहत पंजीकृत किए गए। कश्मीरी कालीनों के लिए भारतीय कालीन प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईसीटी) श्रीनगर जम्मू द्वारा क्यूआर कोड किया गया। केंद्र शासित प्रदेश में हाथ से बुने कालीनों के प्रमाणीकरण के लिए दुनिया में अपनी तरह का यह पहला तंत्र विकसित किया गया है, जिसमें धोखाखड़ी की गुंजाइश नहीं होगी।
इस तंत्र के आधार पर खरीदार स्मार्ट फोन की मदद से वास्तविक समय में अन्य संबंधित मापदंडों के साथ इसकी वास्तविकता और प्रामाणिकता के संबंध में एक कालीन के आवश्यक विवरण की जांच और सत्यापन कर सकता है। क्यूआर कोड में आवश्यक स्पष्ट जानकारी होती है। विभिन्न मापदंडों का आवश्यक भौतिक निरीक्षण और परीक्षण के बाद कालीन पर तय किया जाता है। यह एक विशेष लेबल है जिसे कापी या दुरुपयोग नहीं किया जा सकता है। हाल ही में उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने औपचारिक रूप से कश्मीरी कालीनों के प्रमाणीकरण के लिए क्यूआर कोड तंत्र का शुभारंभ किया था। इस ऐतिहासिक पहल से हाथ से बुने हुए कालीनों की समग्र गुणवत्ता को अधिकृत करने में मदद मिलेगी। इस बीच हस्तशिल्प और हथकरघा विभाग जम्मू कश्मीर ने कालीन निर्यात संवर्धन परिषद (सीईपीसी) के सहयोग से मेरिडियन नई दिल्ली में सेमिनार का आयोजन किया। इसमें जीआई टैग किए गए कालीनों के बारे में जागरूक किया गया। इससे दुनिया भर में कश्मीरी कालीनों की मांग बढ़ने की उम्मीद है।