जम्मू। केंद्रीय बजट में जम्मू-कश्मीर में बिजली, शिक्षा और आपदा प्रबंधन पर जोर देने के साथ विश्व प्रसिद्ध नगीन व डल झील को पुराने स्वरूप में लौटाने और पुनर्वास की प्रतिबद्धता की झलक बजट में दिख रही है। अनुच्छेद 370 हटने के बाद पिछले तीन केंद्रीय बजट में पहली बार डल व नगीन झीलों के लिए केंद्रीय बजट में प्रावधान किया है। इन झीलों में संरक्षण और पुनर्वास कार्यों के लिए बजट में 273 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। यह राशि केंद्रीय अनुदान के रूप में मिलेगी। इस बार बजट में केंद्रीय सहायता को मिलाकर कुल पांच हजार करोड़ रुपये अधिक का तोहफा मिला है। यानी जम्मू-कश्मीर के बजट में इस बार कुल 15 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।
जानकारों का कहना है कि केंद्र सरकार की ओर से केंद्रीय सहायता की राशि पिछले साल की तुलना में 11 फीसदी बढ़ाकर 33923 करोड़ रुपये की गई है जो केंद्र शासित प्रदेश में राजस्व घाटे और संसाधनों की कमी के अंतर को पूरा करने में सहायक होगी। इससे प्रदेश में विकास कार्यों को अंजाम देने में आसानी होगी।
बारिश-बर्फबारी और अन्य प्रकार की प्राकृतिक आपदा की स्थिति में प्रदेश के लोगों को आने वाली मुश्किलों से उबारने के लिए प्रावधान किया गया है। यहां प्रति वर्ष प्राकृतिक आपदा से भारी नुकसान होता है। प्रदेश में निर्माणाधीन कीरू और रेटले जल विद्युत परियोजनाओं की गति जारी रखने के लिए 596.44 करोड़ रुपये का अनुदान दिया गया है। जम्मू-कश्मीर में विशेष छात्रवृत्ति योजना के तहत 225 करोड़ रुपये रखा गया है। वर्ष 2020-21 में यह राशि 128 करोड़ रुपये थी। जम्मू-कश्मीर समेत अन्य राज्यों में सीमावर्ती इलाकों के विकास संबंधी कार्यक्रम (बीएडीपी) के तहत 565.21 करोड़ रुपये का प्रावधान है।
रोपवे प्रोजेक्ट से पर्यटन को लगेंगे पंख
पीपीपी मोड पर राष्ट्रीय रोपवे विकास परियोजना की घोषणा से पहाड़ी राज्यों जम्मू-कश्मीर, हिमाचल, उत्तराखंड तथा पूर्वोत्तर को खास फायदा होगा। मकसद यह है कि इन इलाकों में पर्यटन का विकास हो और सुदूर इलाकों तक सड़क की पहुंच दुर्गम परिस्थितियों के बावजूद हो सके। केंद्रीय मंत्री की ओर से पर्यटन क्षेत्र के विकास के लिए 50 हजार करोड़ रुपये की घोषणा भी जम्मू-कश्मीर में सैलानियों को खींचने तथा पर्यटन को बढ़ावा देने में मददगार होगी।
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विनाशकारी बाढ़ से तबाह ढांचे के लिए नहीं फंड
बजट में 2014 में आई विनाशकारी बाढ़ से तबाह ढांचे की पुनर्स्थापना के लिए किसी भी प्रकार के अनुदान का प्रावधान नहीं किया गया है। 2021-22 में इसके लिए 647.46 करोड़ रुपये का संशोधित बजट प्रावधान किया गया था।
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पिछले बजट में जम्मू-कश्मीर को गैस पाइप लाइन, लद्दाख को विवि का मिला था तोहफा
वित्त मंत्री ने पिछले साल दूसरे बजट में जम्मू-कश्मीर को गैस पाइप लाइन का तोहफा दिया था। यह प्रोजेक्ट बठिंडा से शुरू होकर जम्मू-कश्मीर में आनी थी। फिलहाल गैस पाइप लाइन परियोजना की गति बढ़ी है और जम्मू संभाग के पांच जिलों में अगले दो वर्ष में घर-घर पाइप के जरिये गैस आपूर्ति का लक्ष्य रखा गया है। पिछले बजट में 634 किलोमीटर की दिल्ली-कटड़ा एक्सप्रेस वे को भी शामिल किया था। इससे इस प्रोजेक्ट को गति मिलनी शुरू हो गई है। भूमि अधिग्रहण से लेकर निर्माण कार्य भी शुरू हो चुका है। पिछले बजट में लद्दाख को केंद्रीय विश्वविद्यालय का भी तोहफा मिला था। इसके साथ ही लेह में सेंट्रल इंस्टीट्यूट आफ बुद्धिस्ट स्टडीज के लिए 22.70 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था।