भूमि पासबुक का आवेदन करने के लिए भूमि मालिकों को अपना नाम, राजस्व गांव, पटवार हल्का, खसरा नंबर, खाता नंबर और खेवत नंबर के साथ साथ मोबाइल नंबर और आधार नंबर भी भरना होगा। राजस्व विभाग के आयुक्त सचिव विजय कुमार बिदुरी ने अधिसूचना जारी कर दी है।
राजस्व रिकॉर्ड में भूमि मालिकों का आधार और मोबाइल नंबर जुड़ेगा। इस संबंध में विभाग की तरफ से बकायदा जम्मू-कश्मीर भूमि पासबुक नियम 2022 के तहत अधिसूचना जारी कर दी गई है। भूमि पासबुक का आवेदन करने के लिए भूमि मालिकों को अपना नाम, राजस्व गांव, पटवार हल्का, खसरा नंबर, खाता नंबर और खेवत नंबर के साथ साथ मोबाइल नंबर और आधार नंबर भी भरना होगा।
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राजस्व विभाग के आयुक्त सचिव विजय कुमार बिदुरी ने अधिसूचना जारी कर दी है। भूमि पासबुक नियम आधिकारिक परिपत्र (गजेट) जारी होने के दिन से पूरे प्रदेश में लागू हो जाएंगे। भूमि पासबुक तीन भाषाओं अंग्रेजी, हिंदी और उर्दू में डिजिटल माध्यम से 15 अगस्त 2022 से भूमि मालिकों को उपलब्ध होगी।
इसके लिए 100 रुपये फीस जमा करवानी होगी। भूमि पासबुक में दर्ज पूरे रिकॉर्ड का राजस्व विभाग की तरफ से सत्यापन किया जाएगा।भूमि मालिकों के राजस्व रिकॉर्ड को लेकर अदालतों व बैंकों में भी पासबुक की वैद्यता होगी। वित्तीय संस्थानों से वित्तीय सहायता के लिए भी भूमि पासबुक को दस्तावेज के रूप में प्रयोग में लाया जा सकेगा।
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राजस्व विभाग के आयुक्त सचिव विजय कुमार बिदुरी के अनुसार भूमि पासबुक में आधार नंबर और मोबाइल नंबर को जोड़े जाने से भूमि मालिकों को लाभ ही पहुंचेगा। उदाहरण के तौर पर भूमि मालिक अपनी जमीन बेच रहा होगा या उक्त खसरा नंबर में उसका कोई पड़ोसी या रिश्तेदार जमीन बेच रहा होगा तो राजस्व विभाग की तरफ से मोबाइल नंबर दर्ज होने पर उसे भी सूचित किया जाएगा।