जम्मू। जीएमसी जम्मू और अन्य एसोसिएटेड अस्पतालों में रूटीन सर्जरी निलंबित होने से गैर कोविड मरीजों का दर्द बढ़ने लगा है। महीनों से सर्जरी का इंतजार कर रहे मरीजों का सरकारी अस्पताल में सर्जरी करवाने का इंतजार और लंबा हो गया है। नतीजतन दर्द झेल रहे ऐसे मरीजों को मजबूरन सर्जरी के लिए निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है। इससे गरीब मरीजों पर आर्थिक बोझ के साथ मानसिक तनाव बढ़ा है। जम्मू के एसोसिएटेड अस्पतालों में रूटीन में प्रतिदिन 50-60 छोटी-बड़ी सर्जरी होती हैं। यही हालत कश्मीर के एसोसिएटेड अस्पतालों में रूटीन सर्जरी बंद होने से है।
केस 1
अखनूर निवासी शमशेर सिंह पिछले छह माह से गाल ब्लैडर में पत्थरी से परेशान हैं। जीएमसी में डॉक्टर को दिखाने पर बोला गया था कि जनवरी में सर्जरी कर देंगे। तब से दवाओं के सहारे काम चलाया जा रहा है, लेकिन जब जीएमसी में दिखाने पहुंचे तो पता चला कि रूटीन सर्जरी बंद कर दी गई है, जिससे उन्हें सर्जरी की तिथि नहीं मिल पाई। वह आर्थिक रूप से कमजोर हैं, इसलिए सरकारी अस्पताल में सर्जरी करवाना चाह रहे थे। अब उनके सामने फिलहाल निजी अस्पताल में जाने के सिवा कोई रास्ता नहीं बचा है।
केस 2
उधमपुर निवासी दलजीत कुमार को घुटने में हड्डी में समस्या है। डॉक्टरों ने जनवरी के आखिर में सर्जरी की तिथि दी थी, लेकिन कोविड परिदृश्य को देखते हुए रूटीन सर्जरी को लंबे समय तक निलंबित किया जा सकता है, जिससे उन्हें अपने दर्द को और झेलना होगा। उनका कहना है कि बाजार में सर्जरी का खर्चा 40-50 हजार के बीच बता रहे हैं, जबकि जीएमसी में यह कुछ ही हजार में हो जानी थी।
कोविड के बढ़ते मामलों को देखते हुए जीएमसी और एसोसिएटेड अस्पतालों में रूटीन सर्जरी को निलंबित किया गया है। एसोसिएटेड अस्पतालों में रूटीन में सीटीवीएस में बड़ी 3 से 4, यूरोलाजी में 8 से 10, ईएनटी में छोटी-बड़ी 14 से 15, गायनी में 8 से 10, सर्जरी में 8 से 10, आरथो में 6 से 8 आदि सर्जरी हो रही थीं। जीएमसी के सर्जरी विभाग में सामान्य तौर पर गाल ब्लैडर, पत्थरी, अंतड़ियों में संक्रमण, हर्निया आदि की सर्जरी होती है। जिन पर प्रत्येक सर्जरी पर कुछ हजार रुपये खर्चा आ जाता है, लेकिन किसी निजी अस्पताल में यह लागत 20 से 40 हजार रुपये तक पहुंच जाती है। इसी तरह आरथो में सामान्य सर्जरी में 5 से 10 हजार की लागत आती है, जबकि निजी अस्पताल में इसकी लागत 30 से 50 हजार रुपये तक पहुंच जाती है। हालांकि सरकारी स्तर पर आयुष्मान गोल्डन कार्ड के माध्यम से अधिकांश मरीजों की निशुल्क सर्जरी हो रही है, लेकिन कई निजी अस्पतालों में गोल्डन कार्ड की व्यवस्था नहीं है। जीएमसी की प्रिंसिपल डॉ. शशि सूदन का कहना है कि कोविड के बढ़ते मामलों और बड़ी संख्या में चिकित्सा स्टाफ के संक्रमित होने से रूटीन सर्जरी को फिलहाल निलंबित किया गया है। आगामी हालात सामान्य होने पर सर्जरी को बहाल कर दिया जाएगा।