पिछले साल जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले में हुए हेलिकॉप्टर हादसे में मारे गए पायलट कैप्टन जयंत जोशी के पिता हरीश चंदर जोशी ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को पत्र लिखकर सेना के सभी पायलटों के लिए पानी के अंदर जीवित रहने के प्रशिक्षण और आवश्यक जीवन रक्षक उपकरणों से लैस करने को अनिवार्य बनाने का अनुरोध किया है। उन्होंने लिखा कि अगर जीवन रक्षक जैकेट होती मेरा बेटा और उसका साथी जीवित बच सकते थे। साथ ही उन्होंने हादसे के लिए अफसरों की जिम्मेदारी तय करने का भी अनुरोध किया है।
जोशी को मिले एक जवाबी पत्र के अनुसार उनका अनुरोध पत्र राष्ट्रपति सचिवालय ने रक्षा सचिव को भेज दिया है। आर्मी एविएशन के 254 स्क्वाड्रन के पायलट कैप्टन जयंत जोशी की 3 अगस्त, 2021 को एक उड़ान के दौरान कठुआ जिले के रंजीत सागर बांध के ऊपर हेलिकॉप्टर हादसे में मृत्यु हो गई थी।
कैप्टन जोशी के साथ के एक लेफ्टिनेंट कर्नल एएस बाथ भी थे
आर्मी एविएशन के रूद्र वेपन सिस्टम इंटीग्रेटेड के लड़ाकू हेलिकॉप्टर में कैप्टन जोशी के साथ के एक लेफ्टिनेंट कर्नल एएस बाथ भी थे। उनकी भी मौत हो गई थी। रूद्र हेलिकॉप्टर से दोनों अधिकारी 200 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल वाले रंजीत सागर बांध के ऊपर दुश्मन पर निशाना लगाने और एकीकृत हथियारों के इस्तेमाल करने का अभ्यास कर रहे थे।
लेफ्टिनेंट कर्नल बाथ का शव हादसे के 13 दिन बाद 15 अगस्त को हेलिकॉप्टर के मलबे के साथ बरामद कर लिया गया था परंतु कैप्टन जोशी का शव 71 दिनों के बाद 18 अक्तूबर को बरामद किया गया था।
बांध के ऊपर उड़ान पर उठाए सवाल
कैप्टन जोशी के पिता ने राष्ट्रपति को लिखे पत्र में आर्मी एविएशन में अपनाई जा रही सुरक्षा प्रक्रियाओं पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने लिखा है कि सेना के उड्डयन के मामलों के लिए जिम्मेदार लोगों के बीच पायलट सुरक्षा और प्रशिक्षण आवश्यकताओं के मामले में उदासीनता और उपेक्षा का रवैया भी दिखाई देता है।
रूद्र हेलिकॉप्टर को पानी ऊपर क्यों उड़ाया जा रहा था?
उन्होंने सवाल उठाया कि रूद्र हेलिकॉप्टर पानी के ऊपर उड़ानों के लिए नहीं बना था तो इसे पानी के ऊपर क्यों उड़ाया जा रहा था? मेरा सवाल यह है कि अगर रुद्र को पानी के ऊपर नहीं उड़ाया जाना था, तो स्कवाड्रन के हेलिकॉप्टरों को नियमित रूप से पानी के ऐसे बड़े बांध पर उड़ान भरने के लिए क्यों भेजा जा रहा था जो 25 किलोमीटर लंबा और 8 किलोमीटर चौड़ा था।
उड़ान भरने से पहले आवश्यक सुरक्षा उपकरण प्रदान क्यों नहीं किए गए
जोशी ने कहा कि उन्हें बताया गया था कि यह कम उड़ान के लिए उपलब्ध एकमात्र क्षेत्र है जहां सबसे कम बाधाएं हैं। अगर ऐसा है, तो क्या सेना के उड्डयन के मामलों को चलाने के लिए जिम्मेदार किसी अधिकारी ने बुनियादी प्रशिक्षण की आवश्यकताओं को महसूस किया और उड़ान भरने से पहले उन्हें आवश्यक सुरक्षा उपकरण प्रदान किए गए। क्या उन्हें नहीं पता था कि उनके पायलट हर दिन एक विशाल बांध के ऊपर से उड़ान भरकर अपनी जान जोखिम में डाल रहे थे?
पानी के ऊपर उड़ान का प्रशिक्षण ही नहीं था
जोशी ने कहा कि नियमित रूप से पानी के ऊपर उड़ने के लिए गहराई के बारे में विशेष प्रशिक्षण की आवश्यकता होती है जो पानी की सतह से प्रतिबिंब के कारण जमीन पर उड़ने से अलग है। इसके अभाव में हादसा हो सकता है।
जोशी के अनुसार, उन्हें बताया गया कि कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी ने पाया कि टीम लक्ष्य को हासिल करने में इतनी तल्लीन हो गई कि उन्हें पता ही नहीं चला कि वो पानी के बेहद नजदीक आ गए। सीधे शब्दों में वे गहराई के आकलन में चूक गए और हादसे का शिकार हो गए।
नौसेना के पायलटों को प्रशिक्षण तो सेना को क्यों नहीं
उन्होंने कहा कि दुर्भाग्य से, सेना के सभी पायलट एक ही स्थिति में उड़ान भरते हैं। पानी के ऊपर उड़ान भरने वालों को नियमित रूप से पानी के भीतर भागने और दुर्घटना की स्थिति में जीवित रहने के लिए प्रशिक्षित किया जाता है। नौसेना के पायलटों को यह प्रशिक्षण दिया जाता है।
इन पायलटों को जीवन रक्षक जैकेट भी प्रदान किए जाते हैं ताकि वे तैर सकें और पानी के ऊपर दुर्घटना की स्थिति में उन्हें बचाया जा सके। मेरा बेटा एक जीवन रक्षक जैकेट से वंचित होने के कारण मारा गया। दूसरे पायलट का भी यही हश्र हुआ।