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कश्मीरी पंडितों के पास जम्मू में आवास नहीं

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जम्मू। कश्मीरी पंडितों को घाटी में गोली का डर तो जम्मू में आवास के लिए तरस रहे हैं। 1990 में आतंकवाद के दौर में 60 हजार कश्मीरी पंडित परिवारों ने पलायन किया था। इसमें से 23 हजार परिवार प्रदेश से बाहर बस गए, जबकि 40 हजार से अधिक परिवार जम्मू में बसे हैं। अभी भी हजारों कश्मीरी पंडितों के परिवार किराए के आवास में रहने को मजबूर हैं। हालांकि सरकार ने ऐसे परिवारों के लिए जम्मू शहर के पिरखो, मुट्ठी और नगरोटा स्थित जगती में 5248 फ्लैटों का निर्माण किया था।
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कश्मीरी पंडित के विभिन्न संगठन सरकार से पिरखो में खाली पड़ी जमीन पर फ्लैट निर्माण की मांग कर रहे हैं, ताकि सभी परिवारों को रहने के लिए आवास मिले। पंडिता समुदाय के लोगों का कहना कि पिछले 30 वर्षों से विस्थापन का जीवन जी रहे हैं। कश्मीर घाटी में पंडितों को गोली मिल रही है और जम्मू में हमें आवास के लिए तरसाया जा रहा है। पिरखो में सरकार की 3 हजार के करीब फ्लैट बनाने की योजना है, लेकिन सरकार पंडितों की घाटी में वापसी करने के कवायद में इस प्रोजेक्ट पर काम नहीं कर रही है। लंबे समय से इस प्रोजेक्ट का काम ठंडे बस्ते में है।
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45 हजार के करीब कश्मीरी पंडितों के परिवार जम्मू में बसे हैं। छह हजार के करीब परिवारों को सरकार ने आवास दिया है। पिरखो में तीन हजार फ्लैट बनाने की योजना है, लेकिन उसका काम अभी रुका हुआ है।
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-अशोक पंडिता, राहत आयुक्त जम्मू
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