जम्मूू। जम्मू संभाग में किसानों की आय दोगुना करने के लिए खेती के पुराने सिस्टम में बदलाव लाना होगा। इसके लिए कृषि विज्ञान विश्वविद्यालय जम्मू प्रशिक्षण शिविर लगाएगा। किसानों की फार्मर फेडरेशन भी बनाई जाएगी। इसमें किसानों को नौ समूहों में बांटा जाएगा। प्रत्येक समूह में सौ किसान होंगे। शिविर में किसानों को खाद, यूरिया इत्यादि पदार्थों का इस्तेमाल करने और नई-नई योजनाओं का लाभ लेने के बारे में जानकारी दी जाएगी। इसके लिए विश्वविद्यालय को 18 लाख की राशि मिलने जा रही है। यह बात कृषि विज्ञान विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर प्रो. जेपी शर्मा ने कही।
उन्होंने कहा कि किसानों को सोइल टेस्टिंग कार्ड मुहैया करवाने की योजना भी बनाई जा रही है। सोइल टेस्टिंग के बाद किसानों को पता चलेगा कि कंडी और पहाड़ी क्षेत्रों में किस तरह की फसलों को उगाया जा सकता है। रामबन, डोडा, भद्रवाह, किश्तवाड़, पुंछ, राजोरी, रियासी जिलों में मक्की, गेहूं ही नहीं बल्कि लैवेंडर, लेमन ग्रास इत्य़ादि की खेती भी कारगर है।
प्रो. जेपी शर्मा ने बताया कि किसान दिन रात मेहनत करते हैं, लेकिन मार्केंटिंग के अभाव में फसल की सही कीमत नहीं मिल पाती। इसी लिए केंद्र सरकार ने किसानों के लिए नई-नई योजनाएं शुरू की हैं। जागरूकता के अभाव में किसानों को योजनाओं का लाभ भी नहीं मिल पाता। उन्होंने बताया कि कृषि विज्ञान केंद्र के माध्यम से संभाग के दस जिलों के किसानों तक तकनीक और अहम जानकारियां पहुंचाई जाएंगी।
युवाओं को स्वरोजगार के लिए भी मिलेगा प्रशिक्षण
प्रो. जेपी शर्मा ने कहा कि कृषि विज्ञान विश्वविद्यालय जम्मू में युवाओं को स्वरोजगार के लिए कौशल विकास का प्रशिक्षण देगा। इसमें डेयरी प्रोडक्ट, मधुमक्खी पालन, मछली पालन इत्यादि के बारे में जानकारी दी जाएगी। केंद्र सरकार ने युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए इस तरह की योजनाएं शुरू की हैं। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय ने हाल ही में जम्मू के लोगों के लिए बासमती चावल के तीन बीज तैयार किए थे। जिनमें बासमती जम्मू 118, बासमती जम्मू 123 और बासमती जम्मू 138 की तीन किस्में हैं। जम्मू के किसान इन बीजों का पूरा लाभ ले रहे हैं। इन बीजों की मांग उत्तर प्रदेश और अन्य बाहरी राज्यों में भी है।