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पहाड़ी रास्ते और नदियां पार कर घर-घर टीकाकरण

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जम्मू। कोरोना महामारी के दौरान लोगों की जान बचाने का स्वास्थ्य विभाग में जुनून है। नदी-नाले, पहाड़ियां, दुर्गम रास्ते तय कर विभाग की टीम घर-घर पहुंचकर लोगों को टीका लगा रही है। सेना भी इस काम में मदद कर रही है। उसकी पेट्रोल टीम सुदूर इलाकों में जाकर लोगों को टीकाकरण के लिए जागरूक कर रही है। साथ ही स्वास्थ्य संबंधी आवश्यक जांच भी कर रही है।
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भौगोलिक परिस्थितियों की वजह से जम्मू-कश्मीर के ज्यादातर जिलों में लोग टीकाकरण केंद्रों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग ने तय किया कि वे खुद ही घर-घर जाकर लोगों को टीका लगाएंगे ताकि कोरोना को मात दिया जा सके। कोई भी बिना टीका लगाए न रह जाए। जम्मू संभाग के कठुआ, सांबा, उधमपुर, डोडा, किश्तवाड़, रामबन, रियासी, पुंछ, राजोरी तथा कश्मीर संभाग में बांदीपोरा, कुपवाड़ा, कुलगाम तथा शोपियां में स्वास्थ्य विभाग की टीम घर-घर जाकर टीकाकरण कर रही है। पुलवामा में तो स्वास्थ्य कर्मी तब्बसुम खेतों तक पहुंचीं। यहां धान की रोपाई कर रहे लोगों को टीका लगाया। अब तक अकेले तब्बसुम आठ हजार से अधिक लोगों को टीका लगा चुकी है।
एलओसी से लगते बांदीपोरा जिले के दूरदराज के गुरेज में भी स्वास्थ्य विभाग की टीम किशनगंगा नदी पार कर पहाड़ियों से होते हुए गांव-गांव पहुंचकर लोगों को कोरोना टीका लगा रही है। समुद्रतल से 2400 मीटर की ऊंचाई पर स्थित सुदूर के गांवों तक पहुंचकर टीम यह सुनिश्चित कर रही है कि कोई भी बिना टीका के रह न जाए। स्वास्थ्य कर्मी मोहम्मद सरवर लोन तथा बसीर अहमद दुर्गम पहाड़ियों को पार कर एलओसी से सटे किलशय गांव तक पहुंच गए। यहां उन्होंने 45 साल से अधिक उम्र के लोगों को टीका लगाया। इनका कहना है कि वे लोगों तक हर हाल में पहुंचेंगे चाहे उन्हें कितनी भी परेशानी क्यों न हो। आखिर लोगों की जिंदगी बचाने से ज्यादा बड़ी उनकी परेशानी नहीं है। बांदीपोरा के डा. बशीर अहमद का कहना है कि सरकार की ओर से तय किए गए लक्ष्य के अनुरूप स्वास्थ्य विभाग की टीम घर घर पहुंच रही है। जिले का वेयान गांव देश का पहला गांव होने का गौरव प्राप्त कर चुका है जहां 18 साल से ऊपर के सभी लोगों को टीका लगाया जा चुका है। यहां विभाग की टीम ने पहुंचकर टीकाकरण किया।
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वहीं सेना की ओर से भी टीकाकरण के लिए लोगों को गांव-गांव जागरूक किया जा रहा है। सेना की पेट्रोल टीम दुर्गम पहाड़ियों तक पहुंचकर लोगों का स्वास्थ्य भी जांच रही है। सेना का कहना है कि जम्मू-कश्मीर में भौगोलिक परिस्थितियां काफी दुरुह हैं। कई गांवों तक रास्ते नहीं हैं। पहाड़ियों पर गांव हैं जहां पैदल चलकर पहुंचना पड़ता है। ऐसे में लोगों को जागरूक कर ही उन्हें टीकाकरण के लिए तैयार किया जा सकता है। रियासी के गूल इलाके के साथ ही राजोरी, पुंछ तथा कश्मीर के कुलगाम, शोपियां, बांदीपोरा व बारामुला में यह टीम बेहतरीन काम कर रही है।
टीकाकरण को लेकर कुछ भ्रांतियां भी
टीकाकरण को लेकर तमाम जागरूकता के बावजूद अब भी लोगों में तमाम तरह की भ्रांतियां हैं। कई जगह स्वास्थ्यकर्मियों को टीका लगाने से मना किया जा रहा है। गत सोमवार को बारामुला जिले के क्रीरी में एक महिला ने अपने पति को टीका लगाने से न केवल टीम को रोका बल्कि मारपीट पर भी उतारू हो गई। इस मामले में स्वास्थ्य विभाग को मुकदमा तक कराना पड़ा।
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