दोमाना। सुबह के करीब पौने 9 बज रहे थे। राकेश पंडिता का पार्थिव शरीर जैसे ही जम्मू में उनके रूप नगर स्थित आवास पर पहुंचा तो ‘राकेश पंडिता अमर रहे’ के नारों से आसमान गूंज उठा। पार्थिव शरीर को भाजपा प्रदेशाध्यक्ष रवींद्र रैना के नेतृत्व में एक काफिले में लाया गया। परिजनों ने जब पार्थिव शरीर देखा तो वे टूट से गए और चीख-पुकार मच गई। मां और पत्नी जोर-जोर से बिलख रहे थे। मां अपने बेटे के पैर पकड़कर रोती रही। भाइयों और बेटे का भी यही हाल था। यह मंजर देखकर वहां मौजूद अन्य लोगों और भाजपा नेताओं की आंखों से आंसू बह निकले। हत्याकांड का गुस्सा वहां मौजूद हर शख्स के दिल में था। हर किसी का खून खौल रहा था। सभी हमलावर आतंकियों से बदला लेने की बात कर रहे थे। कोविड प्रोटोकॉल के तहत घर में सिर्फ 20-25 लोग मौजूद थे। श्मशान घाट में भी 100 लोगों की मौजूदगी में अंतिम विदाई दी गई। राकेश पंडिता की हत्या से जम्मू में भी शोक की लहर है।
पारस को सरकारी नौकरी देने की मांग
भाई संजय पंडिता और किंग जी ने कहा कि राकेश पंडिता एक शोकाकुल परिवार में ढांढस बंधाने गए थे। इसी दौरान आतंकियों ने उन पर गोलियां बरसा दीं। उन्होंने राकेश के बेटे पारस को सरकारी नौकरी देने की मांग की। राकेश के एक भाई किंग जी दिव्यांग हैं जो राकेश के परिवार के साथ ही रहते हैं।
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मूलरूप से त्राल के हैं राकेश पंडिता
आतंकी हमले में मारे गए राकेश पंडिता मूल रूप से त्राल के रहने वाले थे, लेकिन वर्तमान में उनका परिवार जम्मू में ही रहा है। कश्मीरी पंडित समुदाय से कई लोग विभिन्न सियासी दलों से जुड़कर घाटी में सक्रिय हैं। बता दें, पिछले साल जून में दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग जिले में आतंकवादियों ने एक कश्मीरी पंडित सरपंच अजय पंडिता की गोली मारकर हत्या कर दी थी। अजय पंडिता (40) कांग्रेस के सदस्य थे और अनंतनाग के लरकीपोरा इलाके में लुकबावां पंचायत हलका के सरपंच थे।