उधर, हाईकोर्ट ने सरकार को बाल अधिकारों के लिए आयोग गठित करने के आदेश दिए हैं। हाईकोर्ट में इसे लेकर याचिका दायर की गई थी। चीफ जस्टिस पंकज मित्तल और जस्टिस जावेद इकबाल वाली खंडपीठ ने बुधवार को मामले पर सुनवाई की और आदेश देकर निपटारा कर दिया कि सरकार बाल अधिकार आयोग का गठन करे और इसके लिए जरूरी दिशा निर्देश और नियम बनाए। हालांकि राष्ट्रीय स्तर के नियम इसमें शामिल किए जा सकते हैं।
कोर्ट ने महसूस किया कि समय समय पर इसे लेकर आदेश दिए गए हैं और समय समय पर सरकार ने भी अपना पक्ष रखा है और बाल अधिकारों के लिए कई कदम उठाए हैं, लेकिन अब भी यह मामला विचार का विषय है। जिसमें बाल अधिकार आयोग का गठन न होना शामिल है। लिहाजा अब इसके लिए आयोग का गठन होना चाहिए। एडवोकेट शिवम महाजन ने कोर्ट को बताया कि हर एक राज्य और केंद्र शासित प्रदेश के लिए आयोग का होना जरूरी है।
उधर, हाईकोर्ट श्रीनगर विंग ने सीडब्लयूएसएन श्रेणी में बच्चों को दाखिला देने वाली याचिका का निपटारा कर दिया। कोर्ट ने कहा कि इस मामले में सरकार को कोई आदेश देने की आवश्यकता नहीं है। लिहाजा याचिका को डिपोज आफ किया जा रहा है।