डॉ. संजीव गुप्ता के अनुसार, कई मामले ऐसे भी सामने आए हैं, जिनमें पीड़ित खासतौर पर किसी सड़क हादसे के बाद देसी इलाज में मालिश आदि करवाता रहा और आखिर में उसके जोड़ खराब हो गए।
जम्मू कश्मीर में अमूमन 50 की उम्र के बाद होने वाली अर्थराइटिस की शिकायत अब युवाओं को भी हो रही है। इसका एक कारण बढ़ते सड़क हादसों में घायल होने वाले 18 से 40 आयु वर्ग के कई युवा देसी इलाज से उपचार पाकर बाद में अर्थराइटिस की समस्या से जूझ रहे हैं। जीएमसी की आर्थो ओपीडी में पहुंचने वाले अर्थराइटिस के कई मामलों में यह इतिहास मिला है। जिसमें पीड़ित महीनों देसी इलाज करवाता रहा और आखिर में उसके जोड़ों में सूजन बढ़ गई।
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आरथो विभाग के एचओडी डॉ. संजीव गुप्ता ने बताया कि आरथो की 300 से 400 की ओपीडी में 25 से 30 प्रतिशत अर्थराइटिस के मामले आ रहे हैं। इसमें 50 से 80 आयु वर्ग के अधिक मामले हैं, लेकिन कई मामले ऐसे भी सामने आए हैं, जिनमें पीड़ित खासतौर पर किसी सड़क हादसे के बाद देसी इलाज में मालिश आदि करवाता रहा और आखिर में उसके जोड़ खराब हो गए। इनमें अधिकांश युवा प्रभावित हैं और ऐसे हादसों में 40 प्रतिशत तक मामलों में युवा प्रभावित होते हैं। चोट से हड्डी व जोड़ में फ्रैक्चर होने पर उसका उचित उपचार न करवाना भी अर्थराइटिस का कारण बनता है। अस्पताल में सामान्य में घुटने का दर्द, कमर का दर्द, हाथों के दर्द की समस्या लेकर पीड़ित अधिक पहुंच रहे हैं। 90 प्रतिशत फ्रैक्चर के मामलों में पुरुष मरीज होते हैं। महिलाएं गलत ढंग से घंटों तक घरेलू कामकाज करती हैं, जिससे उन्हें अर्थराइटिस की शिकायत होती है। इसी तरह युवा घंटों मोबाइल से जुड़े रहते हैं, जिसका जोड़ों पर गलत प्रभाव पड़ता है।
अर्थराइटिस जोड़ों की सूजन व दर्द से जुड़ा रोग है। इसे गठिया भी कहा जाता है। जॉइंट पैन अर्थराइटिस का मुख्य कारण होता है। उम्र के हिसाब से अमूमन 50 के बाद जोड़ों में घिसाव होना शुरू हो जाता है। जिसमें हिप ज्वाइन, हाथों के ज्वाइंट्स आदि होते हैं। इसी तरह जोड़ में सूजन आना यानी स्टिफनेस होने को इंफ्लेमेटरी आर्थराइटिस कहा जाता है। मानव शरीर में एक इम्यून सिस्टम (रोग प्रतिकार शक्ति) का काम होता है जो शरीर में बाहर से आए बैक्टीरिया से लड़ती है। इसमें एक तंत्र होता है जो शरीर के सेल और बाहर के सेल को पहचानता है, लेकिन कभी इस तंत्र में खराबी आ जाती है और वह खुद के शरीर के सेल को बाहर का समझ कर उसे खत्म करने लगता है। इसको आटोइम्यून स्थिति कहा जाता और यह इंफ्लेमेटरी आर्थराइटिस का भाग है।
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लक्षण
घिसावाला अर्थराइटिस वृद्धावस्था में होता है। इसमें ज्यादातर चलने की वजह से या सीढ़ियां ऊपर नीचे करने से घुटनों में दर्द होता है।
इन्फ्लेमेटरी अर्थराइटिस में जोड़ों में सूजन रहती है और तकलीफ सुबह अधिक होती है। यह जकड़न आधे घंटे से अधिक रहती है जो सामान्य नहीं है।
उपाय
अगर जोड़ों में दर्द हो तो आइस पैक का इस्तेमाल करें।
जिस जोड़ में सूजन आ गई है उसे आराम देने की कोशिश करें
आराम करने पर भी सूजन कम नहीं हो रही तो तुरंत डॉक्टर की सलाह लें