जम्मू में डेंगू का डंक जानलेवा होने लगा है। जीएमसी जम्मू के मेडिसिन विभाग में डेंगू से पीड़ित दो महिलाओं की मौत हो गई। दोनों मरीजों को अन्य गंभीर शारीरिक समस्याएं होने के साथ डेंगू बुखार हुआ था। इनमें एक महिला मरीज ने अस्पताल लाने पर कुछ घंटे बाद दम तोड़ दिया। इस साल डेंगू से अब तक दो मौतें हुई हैं। 2013 और 2021 में आधिकारिक तौर पर 4-4 डेंगू मरीजों की मौत हुई थी। हालांकि अनाधिकारिक तौर पर मौतों का आंकड़ा अधिक था।
स्वास्थ्य निदेशक जम्मू डॉ. सलीम उर रहमान ने दो महिला मरीजों की मौत की पुष्टि करते हुए बताया कि दोनों पहले ही गंभीर हालत में जीएमसी लाई गई थीं। उन्हें उचित उपचार के बावजूद बचाया नहीं जा सका। दोनों मौत के मामले का ऑडिट किया जा रहा है। इसमें देखा जा रहा है कि दोनों मरीजों को पहले ही गंभीर शारीरिक समस्याएं थीं। उनके महत्वपूर्ण अंगों में इंफेक्शन थी, जिससे पहले से उनकी शारीरिक क्षमता कमजोर थी। डेंगू से जान गंवाने वाली एक महिला बिलावर की थी।
अब तक प्रदेश में 2565 डेंगू के मामले मिल चुके हैं, जिनमें सर्वाधिक 2209 मामले जिला जम्मू से हैं। जिले में रिहाड़ी, सरवाल, पलोड़ा, जानीपुर सबसे अधिक प्रभावित इलाके हैं। इन इलाकों में कुल मामलों में 60 प्रतिशत यहीं से हैं। इस साल अब तक दस हजार से अधिक लोगों के डेंगू टेस्ट किए जा चुके हैं, जो वर्ष 2021 से दोगुने हैं। जिला सांबा में 89, कठुआ में 50, उधमपुर में 76, रियासी में 48, राजोरी में 16, पुंछ में 14, डोडा में 32, रामबन में 17 और कश्मीर में 3 डेंगू के मामले मिले हैं। इस साल सितंबर में डेंगू सबसे अधिक पीक पर रहा है। इसमें सितंबर के पहले हफ्ते में 278, दूसरे हफ्ते में 443, तीसरे हफ्ते में 400 और चौथे हफ्ते में 631 डेंगू के मामले मिले। अक्तूबर के पहले हफ्ते में 524 डेंगू के मामले मिले हैं।
डेंगू के लक्षण
1. सिर में तेज दर्द और बुखार होना
2. मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द
3. आंखों में दर्द होना
4. जी मचलना, उल्टी होना
बचाव
1. कूलर, पानी की खुली टंकी, फ्रिज की ट्रे, फूलदान, नारियल का खोल, टूटे बर्तन में पानी जमा न होने दें
2. डेंगू का मच्छर दिन में काटता है, ऐसे कपड़े पहने जो शरीर को ढककर रखें
बारिश में लारवा पनपने का खतरा
जम्मू संभाग के कई हिस्सों में हो रही बारिश से लारवा उत्पन्न होने का खतरा बढ़ गया है। डेंगू के मच्छरों को पनपने के लिए जिम्मेदार लारवा के लिए 15 से 26 डिग्री सेल्सियस का अनुकूल तापमान होता है जो मौजूदा कायम है। विशेषज्ञों के अनुसार निर्माण स्थलों, जल स्थलों पर लारवा उत्पन्न होने का अधिक खतरा रहेगा।