फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जम्मू: लोहड़ी पर अग्नि को दिया अर्घ्य, ढोल-ताशे की थाप पर थिरके, मूंगफली, गज्जक और रेवड़ी बांटी

Sun, 14 Jan 2024 01:26 PM IST
kumar गुलशन कुमार अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू

सार

लोहड़ी के पर्व को दुल्ला भट्टी के साथ भी जोड़ा जाता है, जो पंजाब क्षेत्र से नाता रखते थे। उन्होंने अकबर के शासन गलत नीतियों का विद्रोह का नेतृत्व किया था।
विज्ञापन
जम्मू में लोहड़ी मनाते हुए छात्राएं - फोटो : एजेंसी
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

मंदिरों के शहर में शनिवार को लोहड़ी का पर्व धूमधाम से मनाया गया। इस दौरान विभिन्न स्थानों पर अग्नि को अर्ध्य दिया गया। साथ ही लोगों को मूंगफली, गज्जक, रेवड़ी आदि वितरित किए गए। इस दौरान ढोल-ताशे की थाप पर नांच-गाकर खुशियां बांटी।

विज्ञापन


कच्ची छावनी में अरोड़ा वंश सभा ने लोहड़ी मनाई। इसमें परंपरागत छज्जा भी देखने को मिला। ढोल-ताशे की थाप पर जश्न मनाया। इस दौरान पूर्व एमएलसी रमेश अरोड़ा ने कहा कि शायद हमारी नई पीढ़ी भूल चुकी है, उसको याद दिलाने के लिए नौ साल पहले लोहड़ी मनाने की शुरूआत की थी। 

नौ साल की यात्रा में जम्मू-कश्मीर के इतिहास में छज्जा परंपरा को फिर से जीवित किया है। हम चाहेंगे कि यह परंपरा चलती रहे, ताकि इसके साथ जो डोगरा स्वाभिमान जुड़ा हुआ है, वह बनी रहे। उन्होंने सबको लोहड़ी की मुबारकबाद दी। बच्चे और महिलाओं ने भी बढ़चढ़ कर भाग लिया। मौके पर वरिष्ठ भाजपा नेता अब्दुल गनी कोहली, सुनीत कुमार रैना और अरोड़ा वंश सभा के अन्य सदस्य मौजूद रहे।

विज्ञापन

लोहड़ी पर सजे बाजार - फोटो : संवाद
बाबा कैलख देव मन्दिर परिसर में लोहड़ी मिलन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मन्दिर कमेटी के महामंत्री शक्ति दत्त शर्मा ने कहा कि देशभर में लोहड़ी के पर्व की धूम मची है। लोहड़ी का पावन पर्व उत्तर भारत में काफी प्रचलित है। इस पावन दिन लोग फसलों की अच्छी पैदावार के लिए भगवान का धन्यवाद करते हैं। 

लोहड़ी के पर्व में रात के समय लोग अपने घरों के बाहर आग जलाते हैं। इस अग्नि में लोग मक्के और तील से बनी चीजों को अर्पित करते हैं। कार्यक्रम में पूर्व मंत्री सत शर्मा, भाजपा आपदा प्रबंधन कमेटी के सह संयोजक सुनील दत्त राका,प्रभाकर खजुरिया, रजत सूदन,मैदान सेठ ,विनोद खजुरिया आदि उपस्थित रहे।

चाणक्य चौक पर डोगरा ब्राह्मण प्रतिनिधि सभा ने अध्यक्ष वेद प्रकाश शर्मा के नेतृत्व में लोहड़ी का त्योहार उत्साह और उमंग के साथ मनाया। सभा के प्रांगण में एक धार्मिक समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में सदस्यों, सामाजिक एवं धार्मिक कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। अग्नि की देवी को पुराण आहुति दी गई और सभी प्रतिभागियों द्वारा सूखे मेवे आदि का अर्घ अर्पित किया गया। 

वरिष्ठ भाजपा नेता एडवोकेट चंद्रमोहन शर्मा मुख्य अतिथि थे। अध्यक्ष वेद प्रकाश शर्मा ने उपराज्यपाल मनोज सिन्हा से 22 जनवरी को निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट के तहत सार्वजनिक अवकाश घोषित करने का आग्रह किया ताकि लोग अयोध्या में भगवान श्री राम प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में भाग ले सकें। साथ ही आम जनता से इस दिन को दिवाली महोत्सव के रूप में मनाने की अपील की। मौके पर उपाध्यक्ष वीरेंद्र मोहन मगोत्रा, सौजन्य शर्मा, बीएस जम्वाल, सुभाष शास्त्री, पीसी शर्मा और अन्य मौजूद रहे।

डोगरा सदर सभा ने भी डोगरा भवन में पूरे उल्लास और भाईचारे की भावना के साथ लोहड़ी मनाई। सभा के अध्यक्ष व पूर्व मंत्री गुलचैन सिंह चाढ़क ने प्रसिद्ध लोक कथा दुल्ला भट्टी की कहानी सुनाई कि कैसे मुस्लिम समुदाय के बहादुर व्यक्ति ने एक हिंदू लड़की का सम्मान बचाया और उसकी अपनी बेटी की तरह देखभाल की। उन्होंने बताया कि हमारे विविधतापूर्ण देश में सभी त्योहार मौसम और कृषि से भी संबंधित हैं और वर्ग या पंथ के भेदभाव के बिना सभी समुदायों द्वारा एक साथ मिलकर मनाए जाते हैं।

डीएसएस अध्यक्ष ने बताया कि डोगरा क्षेत्र की प्रतिष्ठित महिलाओं को आगे लाने के लिए प्रतिष्ठित महिलाओं को धीयां डोगरें दियां, एक मालती नाम दिया गया है, जिसमें प्रतिष्ठित डोगरा महिलाओं को सम्मानित किया जाता है। मौके पर महासचिव प्रेम सागर गुप्ता, डॉ. अशोक गुप्ता, रवि सिंह, राजेश शर्मा, विद्या सागर शर्मा, राजिंदर गुप्ता, दीपक खन्ना और अन्य मौजूद रहे।

अंबफला स्थित बालनिकेतन में न्यू यंग ब्लड ने बच्चों के साथ मिलकर लोहड़ी का त्योहार मनाया। अध्यक्ष वर्मा ने कहा कि हरसाल संस्था बच्चों के साथ लोहड़ी मनाते हैं। इस दौरान बच्चों फल, जूस और अन्य खाने-पीने की चीजें दी जाती हैं।

डोगरा खत्री सदर सभा ने पक्का डंगा में अध्यक्ष प्रमोद कपाही के नेतृत्व में लोहड़ी मिलन समारोह मनाया। मौके पर उपाध्यक्ष विजय गंडोत्रा, महासचिव संजय पंडो, अशोक नंदा, डॉ. राज कुमार सूरी, राजिंदर कोहली और अन्य खत्री सभा सदस्य मौजूद रहे।

कठुआ: बरनोटी की नई वस्ती में लोहड़ी पर अग्नि को अर्घ्य देते हुए - फोटो : अमर उजाला

कठुआ में भी लोहड़ी का पर्व धार्मिक आस्था और उत्साह के साथ मनाया गया। शनिवार को इस त्योहार के चलते सुबह से ही जहां छोटे बच्चे लोहड़ी मांगते दिखाई दिए, वहीं शाम होने के साथ शहर में जगह-जगह लोहड़ी जलाई गई। लोगों ने पर्व को लेकर मंदिरों में पूजा की और मूंगफली और रेवड़ी की अर्घ्य देकर देश और परिवार की खुशहाली की प्रार्थना की।

लोहड़ी के चलते सुबह से हर ओर रौनक देखने को मिल रही थी। इस दौरान शनिवार को बाजार में मूंगफली, रेवड़ी, गजक व पर्व से जुड़े अन्य सामानाें की खरीदारी जोरशोर से जारी रही। वहीं शाम होने के साथ ही शहर में जगह-जगह लोहड़ी जलाकर लोगों ने अर्घ्य दिया। इस दौरान लोगों ने एक दूसरे को पर्व की बधाई दी। वहीं, काफी संख्या में लोगों ने सुबह घरों और मंदिरों में पूजा अर्चना करके लोहड़ी पर्व पर परिवार की सुख समृद्धि की कामनाएं कीं और शाम को घरों के आंगन में सभी सदस्यों ने एकत्रित होकर सामूहिक रूप से लोहड़ी जलाई और रेवड़ी व मूंगफली का अर्घ्य दिया। इसके अलावा पारंपरिक पकवान भी बनाए गए।

वहीं हर वर्ष को तरह शहर के मुखर्जी चौक, जराई चौक, शहीदी चौक, रामलीला मैदान के अलावा मंदिरों और मोहल्लों में लोगों से सामूहिक रूप से लोहड़ी जलाई गई और अर्घ्य देकर एक-दूसरे को खुशहाली एवं समृद्धि बनी रहने की शुभकामनाएं दी गईं। मूंगफली रेवड़ी व गजक आदि बांटकर खुशी का इजहार किया गया।

नई शादी वाले घरों या नए जन्मे बच्चों के परिवार वालों ने अपने आसपास के परिचितों के घर में इसी वर्ष हुई खुशियां को साझा करने के लिए मूंगफली रेवड़ी व फल आदि बांटे। कई जगह लोग व बच्चे ढोल नगाड़े बजाते हुए लोहड़ी मांगते हुए नजर आए। इस दौरान लोहड़ी के पर्व पर सुंदर सुंदर हो तेरा कौन बेचारा, हो. दुल्ला पट्टी बाला हो यह गीत लोहड़ी के दिन हर गली-मोहल्ले में सुनने को मिला।

विज्ञापन

लोहड़ी पर दुल्ला भट्टी को भी किया जाता है याद
 
लोहड़ी के पर्व को मुस्लिम नायक दुल्ला भट्टी के साथ भी जोड़ा जाता है, जो पंजाब क्षेत्र से नाता रखते थे। उन्होंने अकबर के शासन गलत नीतियों का विद्रोह का नेतृत्व किया था। किंवदंती के अनुसार, मुगल शासक हुमायूं ने दुल्ला के जन्म से चार महीने पहले उसके पिता फरीद खान और दादा संदल भट्टी की हत्या कर दी थी। विद्रोहियों के दिलों में भय पैदा करने के लिए दोनों की खालों को गेहूं की घास में भरकर भरवा गांव के बाहर लटका दिया गया। उनकी हत्या कर दी गई क्योंकि उन्होंने मुगलों को कर देने का विरोध किया था।
 
अपने परिवार की मौत का बदला लेने के लिए दुल्ला भट्टी उस युग का रॉबिनहुड बन गया। वह अकबर के जमींदारों से माल लूटकर गरीबों और जरूरतमंदों में बांट देता था। अकबर उन्हें डाकू के रूप में देखता था।

इसके अलावा दुल्ला को उन महिलाओं को बचाने के लिए जाना जाता है, जिन्हें जबरन गुलाम बाजारों में बेचने के लिए ले जाया गया था। फिर उसने गांव के लड़कों से उनकी शादी तय की और आर्थिक रूप से मदद की। बचाई गई लड़कियों में सुंदरी और मुंदरी भी शामिल थीं जो अब पंजाब के लोकगीत सुंदर मुंदरिये से जुड़ी हुई हैं।

लोककथाओं के अनुसार, दुल्ला भट्टी इतना शक्तिशाली था कि अकबर की 12 हजार की सेना उसे पकड़ नहीं पाई, इसलिए 1599 में लड़ाई के दौरान उसे धोखे से पकड़ लिया गया और फिर उसे फांसी दे दी गई। इसलिए लोहड़ी पर्व के दिन लोग दुल्ला भट्टी और उनके बलिदान को याद करते हैं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें