शराब विक्रेताओं को अब हर साल वार्षिक लाइसेंस शुल्क और अतिरिक्त लाइसेंस शुल्क देना होगा। राजस्व बढ़ाने के लिए सरकार ने वर्ष 2020 और 2021 की आबकारी नीति को मंजूरी दी है। उप राज्यपाल गिरीश चंद्र मुर्मू की अध्यक्षता में प्रशासनिक परिषद की बैठक में इसको मंजूरी दी गई है।
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नई नीति के तहत लाइसेंस को रिन्यू करने, कैंसिल करने और ट्रांसफर करने के अलावा जुर्माना वसूूली के कार्य में पारदर्शिता लाने पर जोर दिया गया है। इसके तहत विभाग अपना राजस्व भी बढ़ाएगा। सरकार ने जोर दिया है कि शराब पर लगने वाले विभिन्न शुल्कों का युक्तिकरण हो। नई नीति का उद्देश्य राजस्व को अनुकूलन करने के लिए करों, कर्तव्यों और अन्य लेवी की संख्या को तर्कसंगत बनाना है।
शराब और मादक पेय पदार्थों के हानिकारक प्रभावों के बारे में अधिक से अधिक सामाजिक चेतना लाना है। इसके तहत पड़ोसी राज्यों के बोतलबंद इन ओरिजिन ब्रांड की बुटलेगिंग की जांच भी की जाएगी। अनुसूचित जाति, जनजाति, अन्य जाति, विकलांगों, पूर्व सैनिकों और समाज के अन्य कमजोर के तबकों को भी शराब का लाइसेंस देने के लिए कुछ आंकड़ें आरक्षित किए गए हैं। हर एक श्रेणी के हिसाब से कोटा तय किया गया है।