जम्मू-कश्मीर के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक के परिसरों सहित 30 अन्य स्थानों पर किरू हाइड्रोपावर परियोजना घोटाले में सीबीआई ने गुरुवार को तलाशी ली। यह पूरा मामला जम्मू संभाग के जिला किश्तवाड़ में चिनाब नदी प्रस्तावित किरू हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट के लिए 2019 में 2,200 करोड़ रुपये के सिविल कार्यों को आवंटित करने में कथित भ्रष्टाचार से जुड़ा हुआ है।
सत्यपाल मलिक 23 अगस्त 2018 से 30 अक्तूबर 2019 के बीच जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल थे। उन्होंने दावा किया था कि उन्हें परियोजना से संबंधित दो फाइलों को मंजूरी देने के लिए 300 करोड़ रुपये की रिश्वत की पेशकश की गई थी।
सीबीआई ने पहले कहा था, '2019 में एक निजी कंपनी को किरू हाइड्रो इलेक्ट्रिक पावर प्रोजेक्ट (एचईपी) के लगभग 2,200 करोड़ रुपये के सिविल कार्यों का ठेका देने में कदाचार के आरोप में मामला दर्ज किया गया था।'
23 मार्च 2022 को किरू हाइड्रो प्रोजेक्ट के सिविल कार्यों के संबंध में अनुबंध देने में आरोपों की सीबीआई द्वारा जांच की गई। इलेक्ट्रिक पावर परियोजना, एंटी करप्शन ब्यूरो और बिजली विकास विभाग की रिपोर्टों के आधार पर कार्रवाई हुई।
जम्मू-कश्मीर सरकार और इन रिपोर्टों के गहन अध्ययन से पता चला कि किरू जलविद्युत परियोजना के सिविल कार्यों के संबंध में अनुबंध देने में ई-टेंडरिंग के संबंध में दिशानिर्देशों का पालन नहीं किया गया था।
वहीं, चिनाब वैली पावर प्रोजेक्ट लिमिटेड की 47वीं बोर्ड बैठक में एक निर्णय लिया गया था। इसके बाद नीलामी के साथ ई-टेंडरिंग के माध्यम से पुन: निविदा के लिए चल रही निविदा प्रक्रिया को रद्द करने के बाद इसे लागू नहीं किया गया। आगे बताया कि उक्त शिकायत प्राप्त होने के बाद नियमित मामला 20 अप्रैल 2022 को फिर से दर्ज किया गया था।
इसमें नवीन कुमार चौधरी तत्कालीन अध्यक्ष चिनाब वैली पावर प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड, एमएस बाबू तत्कालीन प्रबंध निदेशक सीवीपीपीपीएल, अरुण कुमार मिश्रा तत्कालीन निदेशक सीवीपीपीपीएल, मेसर्स पटेल इंजीनियरिंग लिमिटेड एटीजेडी और अन्य पर शिकायत दर्ज की गई थी। जांच के लिए जम्मू-कश्मीर पीसी अधिनियम 2006 और जम्मू-कश्मीर आरपीसी की धारा 120-बी के 5(एलडी) आरडब्ल्यू 5(2) के तहत मामला दर्ज हुआ।
इससे पहले 29 जनवरी को किरू हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट के लिए 2200 करोड़ रुपये के सिविल कार्य का ठेका देने में कथित भ्रष्टाचार के संबंध में रेड की गई, जो कि पांचवें दौर की तलाशी थी। सीबीआई ने इससे पहले 2022 में 21 अप्रैल और 6 जुलाई को इसी तरह के ऑपरेशन किए थे। 17 मई और 2 दिसंबर 2023 में भी तलाशी ली चुकी है।