केंद्र शासित प्रदेश जम्मू कश्मीर के उच्च शिक्षण संस्थानों में उद्योग की मांग और बदलती तकनीक के अनुरूप विद्यार्थियों को तैयार किया जाएगा। उच्च शिक्षण संस्थानों का पाठ्यक्रम उद्योग की बदलती जरूरत के हिसाब से तय होगा, ताकि शिक्षण संस्थानों में ही उद्योग के लिए तैयार कार्यबल मिल सके। इसके लिए सरकार ने जम्मू-कश्मीर उच्च शिक्षा परिषद का पुनर्गठन किया है। दो वर्ष के लिए गठित परिषद सरकार को उच्च शिक्षा क्षेत्र में व्यापक सुधार के साथ अन्य विषयों पर सुझाव देगी।
उपराज्यपाल मनोज सिन्हा की अध्यक्षता में 12 सदस्यीय परिषद का गठन किया गया है। इसमें दिल्ली विवि के पूर्व उप-कुलपति डॉ. दानिश सिंह उपाध्यक्ष होंगे। परिषद प्रदेश सरकार को उच्च शिक्षा क्षेत्र के लिए बनाई जाने वाली नीतियों पर सलाह देगी। इसमें प्रदेश के लिए नई शिक्षा नीति के तहत व्यापक और विकास करने वाली शिक्षा नीति, विवि में अनुसंधान बढ़ाने, नए कोर्स, सिलेबस तय करने, कॉलेज और विवि में संकाय सदस्यों की कमी को पूरा करने पर अपनी सलाह देगी।
परिषद प्रदेश के विवि की विदेश के विवि के साथ अनुसंधान, प्रगतिशील विचारों का आदान- प्रदान करने में मदद करेगी। प्रदेश में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में व्यापक सुधार के उद्देश्य से इस परिषद का गठन किया गया है। उच्च शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव रोहित कंसल ने इसे लेकर आधिकारिक आदेश जारी किया है।
यह है परिषद के सदस्य
- उप-राज्यपाल- अध्यक्ष
- दिल्ली विवि के पूर्व वीसी डॉ. दिनेश सिंह- उपाध्यक्ष
- सदस्यों में- मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव उच्च शिक्षा विभाग, संयुक्त सचिव केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय
- वीसी जम्मू विवि उमेश राय
- वीसी कश्मीर विवि प्रो. निलोफर खान
- वीसी इस्लामिक विवि साइंस एंड टेक्नालोजी अवंतीपोरा प्रो. शकील अहमद रमशो
- वीसी बीजीएसबीयू राजोरी प्रो. अकबर मसूद
- वीसी जामिया मिलिया इस्लामिया प्रो. नजमा अखतर
- निदेशक इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस बंगलूरू प्रो. जी रंगराजन
- प्रो. कंप्यूटर साइंस आईआईटी बॉम्बे डॉ. कवि आर्या
- इस्लामिया कॉलेज ऑफ साइंस एंड कामर्स श्रीनगर डॉ. एजाज अहमद शेख
- जीडीसी बनी के डॉ. विशाल शर्मा