जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने कश्मीर के एक पत्रकार की याचिका पर सरकार से जवाब तलब किया है। पत्रकार गोहर गिलानी ने गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत दर्ज मामले को रद्द करने के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। इस पर हाईकोर्ट के न्यायशीश अली मोहम्मद माग्रे ने सरकार को नोटिस जारी करते हुए अगली सुनवाई 20 मई को अपना पक्ष रखने के लिए कहा है।
पत्रकार की ओर से याचिका दायर करते हुए वकील सलीह पीरजादा ने मांग की कि गिलानी की गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा के साथ साइबर पुलिस स्टेशन के अधिकार क्षेत्र के तहत दर्ज की गई एफआईआर को रद्द किया जाए। प्रतिवादी के पास सूचना प्रोद्यौगिकी अधिनियम 2000 के दायरे से परे अपराधों की जांच करने का कोई अधिकार नहीं है।
याचिकाकर्ता ने कहा कि एफआईआर में लगाए गए आरोपों का कोई आधार ही नहीं है। ऐसे में कानूनी प्रक्रिया के तहत उत्पीड़न नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस तरह से एफआईआर दर्ज करने से पुलिस को अपनी शक्तियों को दुरुपयोग करने की छूट मिल जाएगी।
उल्लेखनीय है कि कश्मीर जोन साइबर पुलिस ने मंगलवार को सोशल मीडिया पर गैर-कानूनी गतिविधियों में लिप्त होने के आरोप में मामला दर्ज किया था। पुलिस ने अपने विश्वसनीय सूत्रों से मिली सूचना में कहा था कि गोहर गिलानी सोशल मीडिया पर आतंकवाद का बखान करने सहित देश के खिलाफ टिप्पणियां करता है। इससे जनता के मन में भय पैदा करने के साथ राज्य की सुरक्षा के लिए खतरा है।