सुप्रीम कोर्ट के अवकाशकालीन न्यायाधीश सूर्यकांत और जेबी परदीवाला ने हाईकोर्ट से इस मामले की सुनवाई करने को कहा था। इस पर जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश समेत खंडपीठ ने सुनवाई की।
घाटी के हैदरपोरा में मुठभेड़ में मारे गए आमिर का शव कब्र से निकालने संबंधी याचिका पर जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट पर सुनवाई कर फैसला सुरक्षित रखा है। आमिर के पिता मोहम्मद लतीफ माग्रे की याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश पंकज मित्थल और न्यायाधीश जावेद इकबाल वानी की खंडपीठ ने फैसला सुरक्षित रखा।
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माग्रे ने शव को कब्र से निकालकर घर ले जाने की अनुमति मांगी थी ताकि वे सुपुर्द-ए-खाक की रस्म को रीति रिवाज से निभा सकें। हाईकोर्ट की एकल पीठ ने कब्र से शव निकालकर घर भेजने की व्यवस्था का आदेश दिया था।
शव की हालत बेहद खराब होने की सूरत में माग्रे को सरकारी खर्च पर कुपवाड़ा स्थित कब्रिस्तान ले जाने और मुआवजे के तौर पर पांच लाख रुपये का आदेश दिया था। इस आदेश के अमल पर हाईकोर्ट की खंडपीठ ने रोक लगा दी थी, जिसके बाद माग्रे ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
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सुप्रीम कोर्ट के अवकाशकालीन न्यायाधीश सूर्यकांत और जेबी परदीवाला ने हाईकोर्ट से इस मामले की सुनवाई का आग्रह किया था, जिस पर हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश समेत खंडपीठ ने सुनवाई की।
इस याचिका में अब माग्रे ने कुपवाड़ा जाकर आखिरी रस्में निभाने देने की इजाजत मांगी है। उल्लेखनीय है कि मुठभेड़ में चार लोग मारे गए थे, जिनमें से दो के शवों को कब्र से निकालकर परिवार सदस्यों को सौंपा गया था।