उन्होंने कहा कि अजमेर शरीफ में हिंदू धर्म के लोग मुस्लिमों से अधिक संख्या में दर्शन के लिए आते हैं। यह दरगाह 800 साल पुरानी है। यदि यह प्रवृत्ति जारी रही तो मुझे डर है कि वे जल्द ही मुस्लिम घरों की तलाशी भी शुरू कर सकते हैं।इससे पहले बुधवार को अजमेर में एक अदालत ने केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) और अजमेर दरगाह समिति से एक याचिका पर जवाब मांगा था, जिसमें दरगाह के शारीरिक सर्वेक्षण की मांग की गई थी।
महबूबा ने देश की स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा अगर यह जारी रहा तो भगवान न करे, हम 1947 जैसी परिस्थितियों में वापस लौट सकते हैं।हम यह न भूलें कि पंडित नेहरू, गांधी जी, मौलाना अबुल कलाम आज़ाद और सरदार पटेल जैसे नेताओं ने इस देश को धर्मनिरपेक्षता की नींव पर खड़ा किया था, और अब वही नींव हिलाई जा रही है। हिंदू और मुस्लिमों को एक-दूसरे के खिलाफ खड़ा किया जा रहा है।
उन्होंने सरकार की आलोचना करते हुए कहा उनके पास रोजगार नहीं हैं, अच्छे स्कूल और अस्पताल नहीं हैं, किसानों के लिए कोई मदद नहीं है, बल्कि हिंदू-मुस्लिम विवादों को बढ़ाकर इन मुद्दों से ध्यान भटकाया जा रहा है। महबूबा ने यह भी कहा कि पूर्व मुख्य न्यायाधीश का इस संदर्भ में कार्य काफी नुकसानदायक साबित हुआ है।