जो किसान सिंचाई के लिए नहर का पानी प्रयोग कर रहे हैं उन्हें प्रति हेक्टेयर के हिसाब से आबियाना (सिंचाई कर) अदा करना होगा। इसके लिए स्लैब भी जारी कर दी गई है। पीडीपी-भाजपा सरकार ने 2015 में आबियाना माफ कर दिया था।
आबियाना यानी सिंचाई कर या इस्तेमाल किए गए पानी की कीमत। जम्मू-कश्मीर में किसानों को सिंचाई के लिए सात साल बाद अब फिर आबियाना देना होगा। सरकार 2015 से इसकी वसूली करेगी। तत्कालीन भाजपा-पीडीपी सरकार ने इसकी वसूली बंद कर दी थी। वित्त विभाग ने अधिसूचना जारी कर दी है।
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अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि जो किसान सिंचाई के लिए नहर का पानी प्रयोग कर रहे हैं उन्हें प्रति हेक्टेयर के हिसाब से आबियाना (सिंचाई कर) अदा करना होगा। इसके लिए स्लैब भी जारी कर दी गई है। पीडीपी-भाजपा सरकार ने 2015 में आबियाना माफ कर दिया था, जिसके बाद वित्त विभाग की ओर से एसआरओ जारी नहीं किया गया। अब 2022 में टैक्स वसूलने पर अधिसूचना जारी की गई है। किसानों को बकाया समेत स्लैब के हिसाब से सिंचाई कर अदा करना होगा। आबियाना की वसूली फसलवार निर्धारित दर के हिसाब से की जाएगी।
2015 से 2017 तक ये रहेगी दर
फ्लड एंड इरिगेशन विभाग 2015 से टैक्स वसूल करेगा। 2015 में ग्रेविटी हेक्टेयर पर टैक्स साठ रुपये था। इसमें दस फीसदी बढ़ोतरी का प्रावधान था। इसी तरह लिफ्ट नहर के लिए 2015 में 250 रुपये, 2016 में 275 और 2017 में 300 रुपये अदा करने होंगे।
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क्या कहते हैं अधिकारी
वित्त विभाग ने इस बारे अधिसूचना जारी की है। नए आदेश के हिसाब से 2015 से आबियाना वसूल किया जाना है। अब ग्रेविटी और लिफ्ट नहर के पानी के प्रयोग पर आबियाना अलग अलग अदा करना होगा। - एफआर भगत, एक्सइएन, बाढ़ एवं सिंचाई विभाग जम्मू।