राज्यपाल सत्यपाल मलिक राज्य में जल्द विधानसभा चुनाव के पक्ष में हैं। कहा कि उन्हें नहीं लगता है कि जून में पीडीपी-भाजपा सरकार गिरने के बाद मौजूदा सदन से राज्य में लोकप्रिय सरकार बन सकती है। पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद से राज्य में राज्यपाल शासन लागू है। जून में भाजपा ने गठबंधन सरकार के अलग होते हुए समर्थन वापस ले लिया था। इसके बाद से ही पर्दे के पीछे से नई सरकार बनाने की सुगबुगाहट शुरू हो गई थी। 87 सदस्यीय विधानसभा में किसी भी दल के पास बहुमत नहीं है। सदन में पीडीपी के 28, भाजपा के 25, नेकां के 15 विधायक हैं।
पिछले दरवाजे से सरकार गठन की अटकलों पर ब्रेक लगाते हुए राज्यपाल ने एक न्यूज एजेंसी से इंटरव्यू में कहा कि हालांकि, वे ऐसी किसी भी कवायद का हिस्सा नहीं हैं। यह पूछने पर कि क्या वर्तमान परिदृश्य में एक लोकप्रिय सरकार बन सकती है तो कहा कि वे ऐसा नहीं सोचते। कम से कम वे किसी भी धांधली का हिस्सा नहीं बनेंगे। मुझे प्रधानमंत्री या फिर किसी अन्य केंद्रीय नेता से इस संबंध में कोई संकेत नहीं मिले हैं।
दिसंबर 2020 में खत्म हो रहे विधानसभा के कार्यकाल तथा नए चुनाव को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में कहा कि उनकी इच्छा है कि राज्य में जल्द से जल्द चुनाव हों। इस बारे में फैसला केंद्र और चुनाव आयोग को लेना है। उनका काम दोहरी जिम्मेदारी (राज्यपाल और प्रशासक) को निभाना है, जिसे वे लगातार जारी रखेंगे।
संविधान के अनुच्छेद 35ए के विवादित मुद्दे पर राज्यपाल ने कहा कि उनका प्रशासन इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई टलने की उम्मीद कर रहा है। राज्य प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि हम कोई चुनी हुई सरकार नहीं हैं और जब तक कोई चुनी हुई सरकार नहीं आ जाती है तब तक इस मामले की सुनवाई को टाल दिया जाए। गत 31 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई को जनवरी के दूसरे सप्ताह में लिस्ट करने के निर्देश दिए थे।