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जम्मू-कश्मीर: राज्यपाल बोले-सुरक्षा बलों का मनोबल किसी महबूबा के बयान से नहीं गिरने दिया जाएगा

Wed, 06 Feb 2019 04:56 PM IST
दुष्यंत शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू

सार

  • पीडीपी प्रमुख के बयान पर मलिक व जितेंद्र सिंह का तीखा हमला
  • उमर ने राज्यपाल के बयान को राजनीति में अनावश्यक हस्तक्षेप बताया
  • महबूबा को गंभीरता से लेने की जरूरत नहीं: राज्यपाल
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Omar Abdullah, Mehbooba Mufti, Satyapal Malik - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती के बयान पर तूफान उठ खड़ा हुआ है। राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने महबूबा पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि चुनाव का वक्त है। उनकी पार्टी टूट रही है। खराब हाल में है। वह इसी किस्म के सपोर्ट से ताकत में आई थीं। उनको गंभीरता के साथ लेने की जरूरत नहीं है। हमारे सुरक्षा बलों का किसी महबूबा मुफ्ती के बयान से मनोबल नहीं गिरने दिया जाएगा।
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केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने ट्वीट किया कि मानवाधिकार को लेकर चुनिंदा मामलों में निंदा की जाती है। ऐसे नेता मुठभेड़ में किसी आतंकी के मारे जाने पर त्वरित संवेदना जताते हैं, लेकिन ड्यूटी कर रहे सुरक्षा बलों के जवानों को संवेदना के एक शब्द भी नहीं मिलते हैं।
 


पूर्व मुख्यमंत्री और नेकां उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने महबूबा को लेकर राज्यपाल की ओर से दिए गए बयान पर ट्वीट किया कि गवर्नर साहब यह स्वीकार करने योग्य बयान नहीं है। साथ ही यह राजनीति में अनावश्यक हस्तक्षेप है। यदि ऐसा ही चलता रहा तो ज्यादा समय नहीं लगेगा जब लोग राजभवन को गंभीरता से लेना बंद कर देंगे। आग्रह किया कि कोई भी बयान देने से पहले वे अपने कार्यालय की गरिमा व मर्यादा का ख्याल रखें। महबूबा ने रिट्वीट किया कि सेना का मनोबल गिराने के लिए दोष देना बंद किया जाए। उन्होेंने कोर कमांडर से भी घटना के संबंध में संज्ञान लेने के लिए बात की है।
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क्या कहा था महबूबा ने

पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने कहा था किजम्मू-कश्मीर के मसले का हल बंदूक से नहीं निकल पाएगा। इसके लिए बातचीत का एक अच्छा माहौल बनाने की जरूरत है। जिस तरह से प्रधानमंत्री ने कहा कि घाटी में आतंकियों की कमर तोड़ देंगे तो मैं यह कहना चाहूंगी कि जम्मू कश्मीर एक सियासी मसला है इसका मिलिट्री हल नहीं है। जब तक यहां बातचीत का माहौल नहीं बनाया जाएगा समस्या का हल नहीं होगा।

पुलवामा के शादीमर्ग के तौसीफ अहमद को सेना कैंप में 44 राष्ट्रीय राइफल्स के मेजर शुक्ला की ओर से गंभीर रूप से पीटे जाने का आरोप है। इसके चलते वह एसएमएचएस अस्पताल में भर्ती है। उन्होंने कहा था कि मेजर शुक्ला के बारे में कहा जाता है कि वह एक बहादुर जवान हैं। तो यह कैसा जवान है जो अपने ही बच्चों को, जम्मू कश्मीर के रहने वाले लड़कों के साथ इतनी ज्यादती और जुल्म कर रहा है।

कैंप में बुलाकर उसकी इतनी पिटाई करना कि वह अस्पताल पहुंच जाए, इसे बहादुरी नहीं कहेंगे। मैं उम्मीद करती हूं कि राज्यपाल, सेना अध्यक्ष, कोर कमांडर इस बात का संज्ञान लेंगे और इस मामले में मेजर शुक्ला से पूछताछ की जाएगी कि आखिर उसकी इतनी पिटाई क्यों की गई। महबूबा ने कहा कि यह बच्चा पहले से यतीम है, इसका भाई फौज में है। अगर उन लोगों का यह हाल होगा जिनके परिजन फौज में हैं तो एक आम कश्मीरी का क्या हाल होगा।
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