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जम्मू-कश्मीर: जैकफेड को बंद करने का सरकार ने जारी किया आदेश, 1985 से ही हो रहा था नुकसान

Thu, 17 Oct 2019 05:04 PM IST
Pranjal Dixit न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू

सार

  • सरकार ने कब्जे में ली सारी संपत्ति, काम की एवज में नहीं आ रहा था पैसा
  • पूर्व में रहे वीसी ने भी उत्थान के लिए मांगा था सरकार से करोड़ों का बजट
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जेएंडके कोआपरेटिव सप्लाई एंड मार्केटिंग फेडरेशन लिमिटेड (जैकफेड) - फोटो : फाइल, अमर उजाला
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विस्तार
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सरकार ने जेएंडके कोआपरेटिव सप्लाई एंड मार्केटिंग फेडरेशन लिमिटेड (जैकफेड) को बंद कर दिया है। इस संबंध में कोआपरेटिव सोसायटी जेएंडके रजिस्ट्रार ने आदेश जारी कर दिए हैं। यह आदेश जेएंडके कोआपरेटिव सोसायटी एक्ट 1989 की धारा 47 की उपधारा (1) के तहत जारी हुए हैं। सरकार ने यह निर्णय फेडरेशन के लगातार घाटे में चलने की वजह ये लिया है।
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जैकफेड तीन साल से काम कर रहा था। इसे वर्ष 1989 में स्थापित किया गया था। तत्कालीन सरकार ने वर्ष 2017 में जैकफेड मामलों को देखने के लिए एक मैनेजिंग कमेटी का गठन किया था। अब जैकफेड के बंद होने से इसके 200 मुलाजिमों के सेवा लाभ सरकार की ओर से सुरक्षित किए जाएंगे। जैकफेड के कुल घाटा 67 करोड़ तक का है।  

जैकफेड के उत्थान को नहीं मिला सरकार से अतिरिक्त बजट
जम्मू कश्मीर कोआपरेटिव सप्लाई एंड मार्केटिंग फेडरेशन (जैकफेड) सरकारी मदद न मिलने के कारण बंद हो गया है। इसके उत्थान के लिए सत्ता में रही सरकारों ने भी कुछ नहीं किया। जैकफेड को करोड़ों रुपये का नुकसान हो चुका है। नुकसान होने पर जैकफेड के रजिस्ट्रार की ओर से बजट की मांग भी की गई। वहीं, प्रदेश में चलने वाली अन्य कारपोरेशन को सरकार की ओर से हर साल फंडिंग होती रही। जैकफेड को कोई राशि नहीं मिली। 1985 से लेकर 2017 तक लगभग 30 करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है।
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जैकफेड के माध्यम से सरकारी विभागों के काम के लिए सीमेंट खरीद, सरिया, किसानों को खाद, गैस की आपूर्ति, विभागों को काम चलाने के लिए वाहन मुहैया कराए जाते थे। इसकी एवज में विभागों से जैकफेड ने करोड़ों रुपये लेना था, मगर नहीं मिला। 2011 के मध्य हालत यह हो गई कि जैकफेड के पास बजट न होने के कारण अन्य सामग्री की खरीदारी के लिए पैसा ही नहीं बचा। पूर्व में रहे वाइस चेयरमैनों ने भी वित्त मंत्रियों के समक्ष बजट की मांग की।

पूर्व वीसी मुनीष कुमार बताते हैं कि जैकफेड को घाटे से उबारा जा सकता था। उन्होंने 2011 से ही इसके लिए प्रयास शुरू कर दिया था। सरकार की ओर से हर साल बजट मिलता रहता तो जैकफेड बंद नहीं होता। जनवरी 2018 में इसे बंद करने के लिए आर्डर जारी हुआ था। अब इसे बंद करने के लिए फिर से अधिसूचना जारी हुई। अधिसूचना में इसे बंद कर दिया गया है। जैकफेड के माध्यम से होने वाले काम नहीं हो सकेंगे। स्टाफ का वेतन निकालना भी मुश्किल हो गया था। 
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