क्लब के निदेशक अनूप वर्मा ने बताया कि डोगरी में संवाद के पीछे उनके पिता हीरा लाल वर्मा का विचार था। उन्होंने अथक मेहनत से रामायण का डोगरी में अनुवाद किया। वर्ष 2010 में अनुवाद पूरा होने पर वर्ष 2011 और 12 में डोगरी में लिखी गई रामायण काे प्रकाशित किया गया। अब यह हमारे लिए मार्गदर्शन का काम कर रही है। रामायण का डोगरी में अनुवाद करने के पीछे रामलीला को स्थानीय भाषा में मंचित करने तक का ही उद्देश्य नहीं था बल्कि इसे जन-जन तक स्थानीय भाषा में पहुंचाना था।डोगरी में संवाद के कारण दोगुनी हुई दर्शक संख्या
अनूप वर्मा ने बताया कि रामलीला का मंचन डोगरी संवादों के साथ करना एक प्रयोग था। हमें नहीं पता था कि यह कामयाब होगा या नहीं, लेकिन लोगों की संख्या को देखकर लगता है कि डोगरी संवाद आकर्षण का केंद्र बने हैं। हिंदी में संवाद सुनकर लोग शायद कुछ ऊब चुके थे। अब उन्हें नवीनता दिख रही है।पहली बार राम पगड़ी और चूड़ीदार पायजामे में, सीता सूट में दिखी।
बिल्लू मंदिर में होने वाले रामलीला मंचन के 100 साल यादगार बनाने के लिए कलाकारों की पोशाकें भी बदली गई हैं। यहां पर अब राम न तो मुकुट में नजर आ रहे हैं और न ही राजशाही पोशाक में। यहां तक की माता सीता भी साड़ी में नहीं दिखाई जा रहीं। राम के लिए अब डोगरी परंपरा के अनुसार ड्रेस तैयार करवाई है जिसमें प्रभु राम कुर्ते और चूड़ीदार पायजामें मे नजर आ रहे हैं। एक भी कलाकार ऐसा नहीं है जिसकी ड्रेस डोगरा परंपरा के अनुसार न हो। लोगों को ये बदलाब खूब पसंद आ रहा है।
क्यों पड़ा मंदिर का नाम बिल्लू मंदिरबिल्लू मंदिर के नाम से जाने जाते राधे-श्याम मंदिर का निर्माण 1839 में भाई चरण दास द्वारा करवाया गया था। बताया जा है कि मंदिर के पुजारी का नाम बिल्लू था। लंबे समय तक इन्होंने ही मंदिर की देखरेख की। इसके नाम पर ही बाद में यह मंदिर प्रसिद्ध हो गया। अब लोग इसे राधे-श्याम के नाम से कम बिल्लू मंदिर के नाम से ज्यादा जानते हैं।
वर्ष 2025 में देखने को मिलेंगे पांच और बदलाव
रामलीला का मंचन फेसबुक पर लाइव होगा- डुग्गर चैनल शुरू की मांग पूरी हुई तो वहां भी लोग इसे लाइव देख पाएंगे
डिस्को लाइटों का इस्तेमाल होगा, पात्रों पर फोकस रखा जाएगा- साउंड सिस्टम को अपग्रेड किया जाएगा, नई धुनों पर चल रहा काम
तीन माह पहले शुरू होगी होगी रिहसर्ल, फिल्मी कलाकार भी बुलाएंगे