देश में सबसे ज्यादा जल विद्युत ऊर्जा की संभावना वाले राज्यों में शुमार जम्मू-कश्मीर आगामी वर्षों में इस क्षेत्र का बड़ा केंद्र बनेगा। रविवार को कुल 4134 मेगावाट क्षमता की पांच परियोजनाओं का करार जम्मू-कश्मीर में 115 साल के जल विद्युत ऊर्जा के इतिहास में सबसे बड़ा कदम है।
लगभग 15 हजार मेगावाट क्षमता में से वर्तमान में बमुश्किल 3500 मेगावाट क्षमता की बिजली परियोजनाएं चल रही हैं। इसमें जम्मू-कश्मीर विद्युत विकास निगम के अधीन 1200 मेगावाट क्षमता के प्रोजेक्ट चल रहे हैं। रविवार को जिन पांच परियोजनाओं के निर्माण का रास्ता साफ हो गया, उनमें शामिल 1856 मेगावाट क्षमता की सावलकोट परियोजना देश की सबसे बड़ी परियोजनाओं में से एक है। जेकेपीडीसी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सावलकोट परियोजना पिछले करीब चार दशक से अधर में थी।
इसी तरह से डुलहस्ती परियोजना भी लंबे समय से लटकी हुई थी। कुल पांच परियोजनाओं पर एमओयू होने से जम्मू-कश्मीर की तमाम बड़ी परियोजनाओं का रास्ता साफ हो गया है। क्षमता के लिहाज से विचाराधीन परियोजनाओं में 390 मेगावाट की किरथई को छोड़ अन्य परियोजनाएं छोटे स्तर की हैं। प्रदेश की घरेलू खपत 2400 मेगावाट के करीब है, जबकि आने वाले समय में जम्मू-कश्मीर कई गुना अधिक बिजली पैदा करने की स्थिति में होगा।
वर्ष 1905 में लकड़ी की 11 किमी लंबी नहर से तैयार हुआ मोहरा प्रोजेक्ट
जम्मू-कश्मीर समेत पूरे देश में सबसे पुरानी जल विद्युत परियोजनाओं में शामिल मोहरा अपने आप में अजूबा है। महाराजा प्रताप सिंह के शासनकाल में यूरोप के इंजीनियरों ने कश्मीर घाटी के बोनियार क्षेत्र में पहली परियोजना तैयार की। झेलम नदी से 11 किलोमीटर लंबी नहर बनाई गई।
खास बात है कि यह संकर नहर लकड़ी से तैयार की गई। इसका पानी सिंचाई और बिजली उत्पादन के लिए किया जाता रहा। 1992 तक 9 मेगावाट क्षमता वाली परियोजना चलती रही, लेकिन बाद में यह बंद हो गई। जम्मू-कश्मीर विद्युत विकास निगम ने इस परियोजना को भारतीय उपमहाद्वीप की सबसे अलग हेरिटेज परियोजना बताकर इसके पुनरुद्धार का प्रस्ताव भेजा है, जिस पर फिलहाल काम नहीं हो पाया है।