जम्मू-कश्मीर में पांच नामित विधायक सरकार बनाने में अहम भूमिका निभाएंगे। इन्हीं के साथ सरकार बनाने का दावा पेश होगा। पहली बार विधानसभा में कश्मीरी विस्थापितों और पीओजेके को सीधा प्रतिनिधित्व मिलेगा। अन्य विधायकों की तरह अधिकार मिलेंगे।
जम्मू-कश्मीर में दस साल बाद बनने जा रही नई सरकार में पहली बार पांच नामित विधायक अहम भूमिका निभाएंगे। इन्हीं विधायकों के साथ सरकार बनाने का दावा पेश किया जाएगा। इन विधायकों को सामान्य विधायकों की तरह सभी अधिकार मिलेंगे।
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विधानसभा में नामित तीन विधायकों में दो कश्मीरी विस्थापित (एक महिला व एक पुरुष) और एक पीओजेके (पाक अधिकृत कश्मीरी विस्थापित) को सीधा प्रतिनिधित्व मिलेगा। इससे पहले ही व्यवस्था में दो नामित महिला सदस्य (विधायक) भी शामिल होंगी।
इस बार की विधानसभा में सामान्य 90 विधायकों के अलावा पांच नामित विधायकों के साथ आंकड़ा 95 पहुंचेगा, जिससे सरकार बनाने के लिए 48 (50 प्रतिशत) का आंकड़ा जरूरी होगा। गृह मंत्रालय से सलाह पर पांच विधायकों को उपराज्यपाल नामित करेंगे।
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पांडीचेरी की तर्ज पर यह व्यवस्था की गई है। हालांकि वहां चार नामित विधायक हैं। जम्मू-कश्मीर में एमएलसी का प्रावधान खत्म होने के बाद यह नई व्यवस्था लाई गई है। सूत्रों के अनुसार 8 अक्तूबर को मतगणना के साथ ही पांच विधायकों को नामित किया जाएगा। 15 अक्तूबर तक सरकार बनाई जा सकती है।
लंबे समय से विधानसभा में कश्मीरी विस्थापितों और पीओजेके को प्रतिनिधित्व देने की मांग की जा रही थी। इसमें दो महिला सदस्यों को नामित करने का प्रावधान पहले से ही था, जिसमें तीन नए सदस्यों को जोड़ा गया है।
पुनर्गठन अधिनियम 2019 में 26 जुलाई 2023 को संशोधन कर नामित विधायक सदस्यों का प्रावधान लाया गया था। इसमें शर्त थी कि नामित सदस्य का 1990 के बाद कश्मीर से विस्थापन होना चाहिए और वह पंजीकृत होना चाहिए। इसी तरह पीओजेके में 1947-48, 1965 और 1971 के विस्थापित सदस्य को नामित किया जा सकता है।
नामित विधायकों के लिए जोड़तोड़ शुरू
सूत्रों के अनुसार तीन नए नामित विधायकों के लिए जोड़तोड़ शुरू हो गया है। इसमें दावेदार सदस्य शीर्ष नेतृत्व से लेकर दिल्ली तक संपर्क साध रहे हैं। भाजपा के बीच में कई पुराने चेहरे भी इस दौड़ में हैं। इसी तरह पीओजेके से भी कई बड़े नेता दावेदारी जता रहे हैं।
कश्मीरी विस्थापितों के मसले प्राथमिकता पर हल होंगे: रैना
पूर्व एमएलसी, कश्मीरी विस्थापित व भाजपा के प्रवक्ता गिरधारी लाल रैना का कहना है कि जम्मू-कश्मीर की विधानसभा में पहली बार दो कश्मीरी विस्थापित विधायकों को नामित किए जाने से उनके मसले प्राथमिकता पर हल होंगे। विधानसभा में सीधी उनकी आवाज पहुंच सकेगी। 1990 में कश्मीर से करीब 65 हजार कश्मीरी पंडित परिवारों का पलायन हुआ था।
चुनाव नतीजे घोषित होने के साथ ही नामांकन प्रक्रिया होगी
भाजपा के मुख्य प्रवक्ता सुनील सेठी ने कहा कि नामित विधायकों को सामान्य विधायकों की तरह सभी अधिकार होंगे। चुनाव के नतीजे घोषित होने के साथ ही इन सदस्यों को नामित करने की प्रक्रिया की जाएगी, ताकि सरकार में इन्हें शामिल किया जा सके।