हाईकोर्ट ने नगर निगम के गांधीनगर स्थित आठ फ्लैट के आवंटन और किराया समझौते को समाप्त कर दिया है। बुधवार को मुख्य न्यायाधीश पंकज मित्तल और न्यायमूर्ति राजेश ओसवाल ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से इस मामले की याचिका पर सुनवाई की। याचिका में शिकायतकर्ता ने इन फ्लैट को कौड़ियों के भाव में चहेतों को आवंटित करने की शिकायत दी है।
कोर्ट ने आवंटन प्रक्रिया पर अधिकारियों को फटकार भी लगाई। खंडपीठ ने आदेश पारित किया कि छह महीने के भीतर परिसरों से कब्जे खाली करने होंगे। नगर निगम द्वारा दुकानों, फ्लैटों, गैरेजों और अन्य नगरपालिका परिसंपत्तियों के अवैध आवंटन को उजागर करने वाले प्रेक्टिसिंग वकील इत्तिजा मुश्ताक सलारिया द्वारा दायर की गई जनहित याचिका पर कोर्ट ने ये निर्देश पारित किए गए हैं।
अब तक नगर निगम ने दुकानें (587), फ्लैट (191) और गैरेज (30) आवंटित किए हैं। याचिकाकर्ता के लिए वकील राहुल रैना, सुप्रिया चौहान, एम जुल्कार नैन चौधरी, नावेद एच नाइक और मुजफ्फर अली शाह के साथ एडवोकेट शेख शकील अहमद ने दलीलें दीं। अधिवक्ता शेख शकील अहमद ने तर्क दिया कि नीति को दरकिनार कर चहेतों को फ्लैट दिए गए हैं। सार्वजनिक संपत्ति का आवंटन केवल नीलामी द्वारा करने की आवश्यकता थी।
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अधिवक्ता एसएस अहमद ने तर्क दिया कि गांधीनगर के एक पॉश इलाके में नगर निगम ने पूर्व आयुक्त, सचिव एच एंड यूडीडी जीत लाल गुप्ता (आईएएस) को 90 रुपये प्रति माह में फ्लैट आवंटित किया। इसी तरह गांधी नगर में एक कैटल पाउंड की पांच लाख रुपये में मरम्मत करवाई गई। बाद में इसे पूर्व संयुक्त आयुक्त को आवंटित किया। नगर निगम ने संपत्ति को कौड़ियों के भाव दे दिया है।
गांधीनगर में इन्हें आवंटित किए गए हैं फ्लैट
जेएमसी द्वारा दिए गए फ्लैटों के लाभार्थियों में जीत लाल गुप्ता (आईएएस), आवास और शहरी विकास विभाग आरएस जमवाल (केएएस) पूर्व संयुक्त आयुक्त नगर निगम, मदन मोहन खजूरिया पूर्व पीए आयुक्त नगर निगम, नरेंद्र शर्मा अध्यक्ष पीस एनओजी, सुरिंदर कुमार पीएसओ पूर्व कमांडर को क्वार्टर आवंटित किए गए हैं। इसके अलावा बलबीर सिंह (ड्राइवर), भारत भूषण (ड्राइवर जेएमसी) के अलावा चैन सिंह और खराती लाल को भी क्वार्टर दिए गए हैं।