प्रदेश में एंटी करप्शन ब्यूरो के स्वतंत्र आर्थिक अपराध विंग को मंजूरी मिले हुए एक साल हो चुका है। लेकिन अभी तक इसने काम करना शुरू नहीं किया। आर्थिक मामलों की जांच करने के लिए इसका गठन किया गया था, लेकिन अब तक इसे शुरू करने में कोई गंभीरता नहीं दिखाई गई है। जानकारी के अनुसार इस विंग के लिए 56 पदों को मंजूरी दी गई थी।
इसमें एक एसपी, एक सीनियर पीओ, तीन डीएसपी, तीन पीओ, इस इंस्पेक्टर, 10 सब इंस्पेक्टर, 5 जूनियर स्केल स्टेनोग्राफर, 20 कांस्टेबल, 3 अर्दली शामिल हैं। लेकिन एक साल हो जाने के बाद भी अब तक इन 56 पदों में से सिर्फ एसपी स्तर के अधिकारी को ही तैनात किया गया है। जबकि बाकी के स्टाफ को पूरा नहीं किया गया है। यहां तक कि भर्ती करने के लिए अधिसूचना तक जारी नहीं की गई है।
बता दें कि यह स्टाफ जीएडी विभाग को तैनात करना है। क्योंकि इसका प्रशासनिक नियंत्रण जीएडी के पास है। जानकारी के अनुसार कुछ दिन पहले ही एसीबी और जीएडी के बीच इसे लेकर बात जरूर हुई है, लेकिन अभी तक कोई अधिसूचना जारी नहीं की गई है। उल्लेखनीय है कि प्रदेश में भ्रष्टाचार के कई मामले लंबित पड़े हुए हैं। जिनकी जांच होनी है।
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आर्थिक अपराध के भी बहुत से मामले लंबित पड़े हुए हैं। लेकिन इस विंग के अब तक शुरू न होने से मामलों की जांच पूरी नहीं हो पा रही है। एसीबी के निदेशक आनंद जैन का कहना है कि बाकी के स्टाफ को नियुक्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। कुछ ही दिन में स्टाफ की नियुक्ति हो जाएगी। इसके बाद आर्थिक अपराध विंग पूर्ण रूप से काम करना शुरू कर देगी।