ई-कोर्ट शुल्क प्रणाली हालांकि जम्मू-कश्मीर में लागू है। काॅरपोरेशन ने करार से लेकर अब तक और आधिकारिक लांचिंग के दौरान कंपनी ने अब तक 43 लाख ई-स्टांप प्रमाणपत्र जारी किए हैं और ई-स्टैंपिंग प्रणाली से तीन माह में 510 करोड़ रुपये स्टांप ड्यूटी वसूल की है।
न्यायिक स्टांप शुल्क के लिए जम्मू-कश्मीर में ई-कोर्ट शुल्क प्रणाली को औपचारिक रूप से लांच कर दिया गया है। प्रदेश सरकार ने स्टॉक होल्डिंग कारपोरेशन आफ इंडिया लिमिटेड (एसएचसीआईएल) को ई-कोर्ट शुल्क प्रणाली तैयार करने और लागू करने के लिए केंद्रीय रिकॉर्ड कीपिंग एजेंसी के रूप में नियुक्त किया है।
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ई-कोर्ट शुल्क प्रणाली हालांकि जम्मू-कश्मीर में लागू हो चुकी है। कारपोरेशन ने करार से लेकर अब तक और आधिकारिक लांचिंग के दौरान कंपनी ने अब तक 43 लाख ई-स्टांप प्रमाणपत्र जारी किए हैं और ई-स्टैंपिंग प्रणाली से तीन माह में 510 करोड़ रुपये स्टांप ड्यूटी वसूल की है।
यह प्रणाली नागरिकों को स्टांप विक्रेताओं के माध्यम से आनलाइन और आफलाइन भुगतान करने का विकल्प देती है। वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अटल डुल्लू ने ई-कोर्ट शुल्क प्रणाली को पूरी तरह से लागू करने की मंजूरी दी है। 22 सितंबर को केंद्रीय रिकॉर्ड कीपिंग एजेंसी के रूप में एसएचसीआईएल का चयन किया गया था।
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प्रदेश के कानून विभाग द्वारा संबंधित एजेंसी के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे। इस प्रणाली से आम लोगाें को सुविधा होगी जबकि स्टांप विक्रेताओं के काम का दायरा और आय में वृद्धि होगी। इससे पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी।
एसएचसीआईएल एक सरकारी कंपनी है और पहले ही पूरे यूटी में ई-स्टैंपिंग सिस्टम लागू कर चुकी है। कंपनी के प्रतिनिधियों ने विधि विभाग की मदद से प्रत्येक जिला न्यायालय का दौरा किया और अधिकारियों के साथ स्टांप विक्रेताओं को प्रशिक्षित किया है। अब तक कुल 244 न्यायालय अधिकारियों और 373 स्टांप विक्रेताओं को प्रशिक्षित किया जा चुका है।