श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर नशे की दलदल में धंसता जा रहा है। एम्स और नेशनल ड्रग डिपेंडेंस ट्रीटमेंट सेंटर (एनडीडीटीसी) के सर्वे में पाया गया कि कश्मीर के अनंतनाग और श्रीनगर जिले में ही 18-18 हजार लोग ड्रग एडिक्ट हैं, जिनमें से 90 फीसदी
हेरोइन का नशा करते हैं। इन दोनों जिलों में ही प्रतिदिन 3.5 करोड़ रुपये का नशा खरीदा जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में छह लाख लोग नशे के आदी है। इनमें 90 फीसदी युवा हैं।
जीएमसी श्रीनगर के नशा मुक्ति केंद्र में हर साल छह हजार से ज्यादा नशे के आदी उपचार के लिए आते हैं। हाल ही के कुछ वर्षों के नशा करने वालों के आंकड़े और चिंताजनक बन गए हैं। क्योंकि अब हेरोइन, कोकीन और ब्राउन शुगर जैसे घातक नशीले पदार्थों का अधिक प्रयोग किया जा रहा है और ये आसानी से उपलब्ध हो रहे हैं।
नशा मुक्ति केंद्र के प्रभारी डॉ. यासिर राथर ने बताया कि उपचार के लिए 90 फीसदी लोग हेरोइन का सेवन करने वाले ही आ रहे हैं। इनमें 60 फीसदी लोग इसका इंजेक्शन ले रहे हैं, जो मौत का कारण बन रहा है।
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खौफनाक है नशे की दलदल
में फंसे युवकों की आपबीती
श्रीनगर के सरकारी नशा मुक्ति केंद्र में इलाज करा रहे नशा पीड़ितों का कहना है कि घाटी में नशा आसानी से मिल रहा है। बिलाल अहमद (काल्पनिक नाम) की कहानी तो बेहद खौफनाक है। बिलाल अपने एक दिन के बच्चे को बेचने वाला था, क्योंकि उसके पास नशा खरीदने के लिए पैसे नहीं थे। एडवांस के पैसों से उसने नशा खरीदा, लेकिन जब तस्कर बच्चा लेने आए तो वह टूट गया और अस्पताल की तीसरी मंजिल से कूद गया। केंद्र में इलाज करवा रहे एक अन्य युवक ने बताया कि सिगरेट से शुरुआत कर वह हर नशे का सेवन कर चुका है। उसका आरोप है कि नशा हर जगह उपलब्ध है, बस पैसा होना चाहिए और इसलिए सवाल उठता है कि आखिर पुलिस की मदद के बिना यह काम कैसे होगा।
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कोरोना के बीच और बढ़ गई नशा तस्करी
कोरोना के बीच भी नशा तस्करी बढ़ी है। इससे छात्र ज्यादा शिकार हुए हैं। ज्यादातर 15 से 30 साल के युवा ज्यादा नशे की लत में पड़ रहे हैं। 2020 में 36.08 किलो हेरोइन और 49.7 किलो ब्राउन शुगर बारामुला और कुपवाड़ा के सरहदी जिलों से पकड़ी गई। 2021 में भी इन दो जिलों में ही सबसे ज्यादा नशा बरामद हुआ। नशे के इस खेल में नशीली दवाइयों का भी इस्तेमाल हो रहा है। अक्तूबर में पुलवामा जिले में नशीली दवाओं की बड़ी खेप पकड़ी गई।
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नशा तस्करी से आतंकी फंडिंग के तार जुड़े
पुलवामा के डीएसपी जुनैद शफी का कहना है कि इन नशीली दवाइयों से लेकर हेरोइन और कोकीन की तस्करी बढ़ी है। 2015 में इस धंधे से जुड़े 708 लोगों को प्रदेश में पकड़ा गया। 2020 में यह आंकड़ा 1,672 पहुंच गया। सुरक्षा एजेंसियों के लिए भी यह आंकड़े चिंता बने हैं, क्योंकि इससे आतंकी फंडिंग के तार भी जुड़े हैं। खुफिया एजेंसियों के अनुसार पाकिस्तान से आने वाले नशे से 20 प्रतिशत कमाई टेरर फंडिंग में जाती है।
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पाकिस्तान से हो रही ज्यादातर नशे की तस्करी
पुलिस का कहना है कि ज्यादातर नशा पाकिस्तान से आता है। पुंछ सेक्टर और एलओसी पर कई ड्रग्स की खेप पाकिस्तान ने ड्रोन से भी भेजीं। जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिव ने हाल ही में एक बैठक बुलाई, जिसमें नार्को को-ऑर्डिनेशन केंद्र की राज्य स्तरीय समिति ने केंद्र शासित प्रदेश में नशा तस्करी से निपटने के लिए एक परियोजना की रूपरेखा तैयार की।
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केंद्रीय गृह मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार
- 2015 में जम्मू-कश्मीर में 72.07 किलो हेरोइन पकड़ी गई
- 2019 में प्रदेश में 200 किलो से ज्यादा हेरोइन बरामद की
- 2020 में 152 किलो हेरोइन और 49 किलो ब्राउन शुगर पकड़ी
- 2021 में अब तक 100 किलो से ज्यादा हीरोइन और ब्राउन शुगर बरामद की