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Jammu Kashmir: डीएनए टेस्ट से खुलेंगे अपराध के राज, J&K के लोगों का रक्त संबंध एशियाई और अरब देशों से जुड़ा

Tue, 12 Nov 2024 02:31 PM IST
निकिता गुप्ता अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू

सार

एफएसएल ने अदालतों में मजबूती से डीएनए से संबंधित सबूत पेश करने के लिए 694 लोगों के सैंपल पर अध्ययन किया, जिससे कश्मीर के लोगों का आनुवंशिक संबंध एशियाई/अरब देशों से जुड़ा होने की पुष्टि होती है।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल)अदालतों में अब मजबूती से डीएनए के सबूत पेश कर सकेगी। इससे आपराधियों को सजा दिलाने में मदद मिलेगी। एफएसएल ने मानव आबादी पर हाइपर वेरिएबल शॉर्ट टेंडम रिपीट्स (एसटीआर) पर आधारित पहली बार जेनेटिक डेटा प्रकाशन की घोषणा की है, जिसे इंटरनेशनल जर्नल ऑफ लीगल मेडिसिन (आईजेएलएम) में प्रकाशित किया गया था।

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एफएसएल के वैज्ञानिकों ने वर्ष 2019 से लेकर अब तक ऐसे 694 व्यक्तियों पर अध्ययन किया। जिनका आपस में कोई संबंध नहीं था। अध्ययन से प्राचीन रेशम मार्ग के माध्यम से जुड़े मध्य एशियाई/अरब देशों के साथ कश्मीर के विभिन्न जिलों के काफी मिश्रण और आनुवंशिक संबंध की पुष्टि होती है। जबकि जम्मू जिले की पंजाब, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान से आनुवंशिक संबंध बताया है। जबकि किश्तवाड़, रियासी और रामबन ऐसे जिले मिले हैं, जिनके आनुवंशिक आपस में मेल नहीं खाते। ये एक दूसरे से काफी अलग हैं।

वैज्ञानिकों की टीम को लीड करने वाले और प्रकाशित रिपोर्ट के लेखक डाॅ नदीम मुबारिक ने कहा कि ये पहला व्यापक ऑटोसोमल एसटीआर अध्ययन है। जिसका कानून की अदालतों में न्याय वितरण पर संभावित प्रभाव है। अदालतों में प्रस्तुत डीएनए साक्ष्य अब साक्ष्य के वजन को प्रस्तुत करने वाले सांख्यिकीय डेटा द्वारा पूरक होंगे। इसके अलावा प्रदेश में आनुवंशिक रोगों के प्रबंधन पर गहरा प्रभाव पड़ेगा। एफएसएल के निदेशक गुरमुख सिंह ने सभी लेखकों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि इससे अदालतों में न्याय वितरण पर निश्चित रूप से सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। जिससे डीएनए से संबंधित मामलों, विशेष रूप से पाॅक्सो के केस में फैसले जल्द हो सकेंगे।

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