कार्तिक मास की कृष्ण त्रयोदशी को धनतेरस का पर्व मनाया जाता है। इस वर्ष कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 22 अक्तूबर शनिवार शाम 6.03 बजे से शुरू हो रही है जो 23 अक्तूबर शाम 6.04 मिनट पर समाप्त होगी। सूर्योदय व्यापिनी कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि रविवार को होगी, इसलिए इस वर्ष धनतेरस का पर्व 23 अक्तूबर रविवार को ही मनाया जाएगा।
पंडित देवदत शास्त्री और अचाचार्य देवी दास शास्त्री ने कहा कि पौराणिक कथाओं के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान कार्तिक मास की कृष्ण त्रयोदशी के दिन भगवान धनवंतरी अपने हाथों में अमृत कलश लेकर सागर मंथन के बाद प्रकट हुए। इसके बाद धनतेरस का त्योहार मनाया जाता है। भगवान धनवंतरी विष्णु के अंशावतार हैं।
धनतेरस पर पूजन का शुभ मुहूर्त 21 मिनट
पंडित देव दत शास्त्री ने कहा कि धनतेरस पूजा का शुभ मुहूर्त रविवार को शाम 5:43 बजे से शाम 6:04 बजे तक है। कुल अवधि 21 मिनट की। प्रदोष काल: शाम 5:44 बजे से 8:16 बजे तक। वृषभ काल: शाम 6:58 बजे से रात 8:54 बजे तक। प्रॉपर्टी, आभूषण, सोना, चांदी, बर्तन, दोपहिया व चार पहिया वाहन, निवेश करने और नए उद्योग की शुरुआत इलेक्ट्रॉनिक्स सामान के लिए सबसे उत्तम मुहूर्त सुबह 7:08 से 09: 16 बजे तक। अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:42 से 12:27 बजे तक। दुपहर 01:05 से 02:29 बजे तक। दोपहर 2:45 से 5:30 बजे तक। शाम 5:32 बजे से रात 6:04 बजे तक। शेयर आदि की खरीद-फरोख्त शुभ मुहूर्त रविवार सुबह 3:46 बजे से सुबह 6 बजे तक करे।
खंड ग्रास सूर्यग्रहण 25 को
जम्मू। जम्मू-कश्मीर विद्वत परिषद के अध्यक्ष विश्व मूर्ति शास्त्री ने कहा कि 25 अक्तूबर को खंड ग्रस सूर्यग्रहण लेगा। उन्होंने कहा कि यह ग्रहणसूर्य - ग्रस्त रहेगा। इसलिए इस ग्रहण को ग्रस्तास्त ग्रहण कहा गया है। 25 अक्तूबर को शाम 4.17 बजे से ग्रहण शुरू होगा जो शाम 6.22 पर समाप्त होगा। ग्रहण का सूतक 12 घंटे पहले शुरू होगा। ग्रहण से पूर्व स्नान करे और सप्ताति के बाद पर्वकाल में देव पूजन, तर्पण, हवन तथा दान देने का बहुत महत्व है। ग्रहण के दौरान बच्चें, बुजूर्ग और बिमार व्यक्ति भोजन कर सकता है। ग्रहण के दौरान गर्भवती सित्रयों को विशेष सावधानी रखनी चाहिए।