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पर्यटन क्षेत्र पर विशेष ध्यान केंद्रित हो

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जम्मू। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की ओर से पेश किए जा रहे आगामी केंद्रीय बजट से जम्मू-कश्मीर के उद्योगपतियों और कारोबारियों को कई उम्मीदें हैं। पिछले दो साल से कोविड और अन्य परिस्थितियों के कारण पर्यटन और उससे जुड़े क्षेत्र बुरी तरह से प्रभावित हुए हैं, इसलिए पर्यटन क्षेत्र पर विशेष ध्यान दिया गया है।
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चैंबर ऑफ ट्रेडर्स फेडरेशन के प्रधान नीरज आनंद ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में लंबे समय से कोई ट्रेड नीति लाने की मांग की जा रही है, ताकि ट्रेड से जुड़े लोगों को राहत दी जा सके। वर्तमान में ऐसी कोई नीति नहीं है, जिसमें कारोबारियों को कुछ विशेष मिल सके। पिछले दो वर्षों से कोरोना और अन्य दूसरी परिस्थितियों के कारण प्रदेश में ट्रेड बुरी तरह से प्रभावित हुआ है। सरकार जीएसटी का सरलीकरण भी नहीं कर पाई है, जिससे कारोबारियों के सामने कोविड जैसे खराब समय में कई चुनौतियां रही हैं। जीएसटी प्रक्रिया के सरल न होने के कारण कारोबारियों की परेशानी बढ़ी है। सरकार को जीएसटी प्रक्रिया में संशोधन करके इसे और आसान बनाना चाहिए। इसी तरह प्रदेश में व्यापार करने में प्रक्रिया को सरल और आसान बनाया जाना चाहिए, ताकि अधिक से अधिक लोग रोजगार से जुड़ सकें। आल जम्मू होटल एंड लगेज एसोसिएशन के प्रधान पवन गुप्ता ने कहा कि जम्मू कश्मीर की अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा पर्यटन पर निर्भर है। लेकिन पिछले दो साल से पर्यटन प्रभावित हुआ है। इसके साथ जुड़े होटल, ट्रैवल आदि क्षेत्र भी प्रभावित हैं। कोविड की पहली लहर में होटल व्यवसाय को बिजली, पानी में कुछ राहत दी गई थी, लेकिन दूसरी लहर में कुछ नहीं दिया गया और फिर तीसरी लहर में भी पर्यटन प्रभावित है। बजट में प्रदेश के पर्यटन क्षेत्र के लिए विशेष पैकेज की घोषणा की जाए। इसके साथ जम्मू में सुस्त निर्माणाधीन पर्यटन परियोजनाओं को गति देने के लिए विशेष राशि जारी की जाए। रघुनाथ बाजार बिजनेसमैन एसोसिएशन के प्रधान संजय गुप्ता ने कहा कि सरकार यूपी चुनाव के बाद देश में गारमेट और दूसरे पदार्थों पर जीएसटी की स्लैब 5 फीसदी से बढ़ाकर 12 फीसदी करने की योजना बना रही है, जो नहीं होनी चाहिए। कारोबारी पहले ही कोविड की मार झेल रहा है। इससे ग्राहकों पर भी आर्थिक बोझ बढ़ेगा। सरकार को पुरानी जीएसटी स्लैब को सीमित रखना चाहिए।
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