आवारा पशुओं का आतंक
रात के समय चिनाब नदी की सीमा से झुंड के झुंड आने वाले आवारा पशुओं ने किसानों की नींद हराम कर रखी है। ये जिस तरफ घुसते हैं फसल सफाचट कर देते हैं। बाजमती के पौधे तो इनका पसंदीदा आहार होते हैं। किसान शिकायत करते हैं तो वाइल्ड लाइफ विभाग बाढ़ विभाग को नियंत्रण के लिए उत्तरदायी ठहराया है और बाढ़ विभाग सिंचाई विभाग को। चिनाब के किनारे बाड़बंदी हो तो इन पशुओं से निजात मिले।
जीआई टैग मिले तो बहुरें किसानों के दिन -क्षेत्र में किसानों का कहना है कि अगर सरकार यहां के बासमती को जीआई टैग दिलाए और एक विशेष ब्रांड के रूप में प्रमोट करे, तो यह भी आर.एस. पुरा की तरह विश्व प्रसिद्ध हो सकता है। किसानों ने एमएसपी पर खरीद केंद्र खोलने और बासमती के लिए उचित मूल्य तय करने की भी मांग की है।
एसडीएओ विजय चौधरी ने बासमती किसानों की समस्याओं के बावत पूछने पर कहा, किसानों को णवत्ता के एफ1, एफ2 प्रमाणित बीज दिए जा रहे हैं। पॉलीहाउस में उच्च गुणवत्ता के बीज तैयार करने के लिए सब्सिडी दी जा रही है। बेहतर कीमत और ब्रांडिंग के लिए किसानों को कि अगर किसान ऑर्गेनिक खेती की तरफ कदम बढ़ाएं तो उसकी कीमत भी अच्छी मिलेगी और बाहर भी मांग होगी। ब्रांड और जीआई टैग को लेकर उचित कदम उठाने का आश्वासन दिया।
किसान सूरज शर्मा: नई तकनीकों से बासमती को दिलाना चाहते हैं पहचान
जब पारंपरिक खेती मुश्किलों से घिर रही हो, तब कुछ किसान बदलाव की ओर कदम बढ़ाकर मिसाल पेश कर रहे हैं। अखनूर क्षेत्र के सूरज शर्मा ऐसे ही एक प्रगतिशील किसान हैं, जो न सिर्फ बासमती चावल की उन्नत खेती कर रहे हैं, बल्कि नई तकनीकों के साथ जैविक खेती को भी बढ़ावा दे रहे हैं।
सूरज शर्मा ने हाल ही में सरकारी सहायता से पॉलीहाउस का निर्माण करवाया है। इससे वे बेहतर गुणवत्ता वाले बीज तैयार कर रहे हैं । वे न सिर्फ पारंपरिक बासमती उगा रहे हैं बल्कि यूपी में होने वाले विश्व प्रसिद्ध कालानमक की खेती का सफल प्रयोग कर रहे हैं। इस किस्म का चावल डाइबटीज व ह्दय रोग के मरीजों के लिए इसे बेहतरीन माना जाता है।