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जम्मू-कश्मीर: कृषि के विकास के लिए बैंकिंग सेक्टर निभाएं भूमिका, एलजी बोले- युवाओं के लिए कई योजनाएं

Mon, 20 Feb 2023 02:31 AM IST
विमल शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू

सार

उप राज्यपाल ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में भू-जलवायु परिस्थितियों की अपनी चुनौतियां हैं, जो ज्यादातर छोटे और सीमांत किसानों को प्रभावित कर रही हैं। इन किसानों को बैंकिंग प्रणाली से जोड़ने की जिम्मेदारी सभी बैंकों की है।
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जम्मू में आयोजित कार्यक्रम के दौरान एलजी मनोज सिन्हा - फोटो : संवाद
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विस्तार
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कृषि और संबद्ध क्षेत्र के त्वरित विकास के सपने को साकार करने में बैंकिंग क्षेत्र को प्रमुख भूमिका निभानी होगी। साथ ही सहकारी बैंकों के पुनरुद्धार के लिए किसानों को हर संभव सहायता और पर्याप्त धनराशि दी जाएगी।

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यह बात उप राज्यपाल मनोज सिन्हा ने जम्मू में कृषि के भविष्य के वित्तपोषण पर हुई एक संगोष्ठी में कही। कहा, अमृत काल के पहले बजट ने समावेशी विकास और समाज के हर वर्ग के वंचितों को वरियता की दृष्टि से सशक्त बनाने और कृषि क्षेत्र को प्राथमिकता देने का रास्ता दिखाया है।

उन्होंने कहा कि इस वर्ष के बजट में परिकल्पित कृषि त्वरक कोष, ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि-स्टार्टअप को प्रोत्साहित किया जाएगा। यह स्थानीय युवाओं को उद्यमशीलता के अवसर प्रदान करेगा और कृषि क्षेत्र में चुनौतियों से निपटने के लिए किफायती समाधान होगा।
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कहा कि कृषि ऋण लक्ष्य को बढ़ाकर 1000 करोड़ रुपये कर दिया गया है। उप राज्यपाल ने कृषि क्षेत्र में परिवर्तन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पिछले तीन वर्षों में प्रशासन द्वारा शुरू किए गए प्रगतिशील सुधार किसानों को लाभांश दे रहे हैं।

प्रदेश में कृषि और संबद्ध क्षेत्र के समग्र विकास के तहत परियोजनाएं देश के कृषि क्षितिज में कुछ प्रमुख दीर्घकालिक और महत्वपूर्ण हस्तक्षेपों में से एक हैं। उन्होंने कहा कि कृषि और संबद्ध क्षेत्र के समग्र विकास के लिए 5013 करोड़ रुपये की क्रांतिकारी परियोजनाएं भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए व्यावहारिक समाधान करेंगी।

कृषि और संबद्ध क्षेत्रों का समग्र विकास जम्मू कश्मीर में कृषि उद्यमियों का एक मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करेगा और क्षेत्रों में रोजगार सृजित करेगा। उप राज्यपाल ने किसानों को संस्थागत ऋण प्रवाह को सुव्यवस्थित करने पर जोर दिया।

उप राज्यपाल ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में भू-जलवायु परिस्थितियों की अपनी चुनौतियां हैं जो ज्यादातर छोटे और सीमांत किसानों को प्रभावित कर रही हैं। इन किसानों को बैंकिंग प्रणाली से जोड़ने की जिम्मेदारी सभी बैंकों की है।

उन्होंने कहा कि बैंकिंग संस्थान विशेष रूप से बिना बैंक वाले गांवों में किसानों तक अधिकतम संस्थागत ऋण सुनिश्चित करने के लिए सबसे महत्वपूर्ण समर्थन प्रणाली हैं।

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