केंद्र सरकार की ओर से दो साल का विस्तार मिलने के बावजूद जम्मू कश्मीर की 4100 से अधिक पंचायतों के विकास कार्यों पर करीब सौ करोड़ रुपये की राशि खर्च नहीं हो पाई है। ग्रामीण विकास व पंचायती राज विभाग ने पंचायतों में 14वें वित्त आयोग के तहत जारी राशि के उपयोग पर तत्काल प्रभाव से रोक (फ्रीज) लगा दी है।
इस आदेश के बाद वर्तमान में चल रहे विकास कार्य जारी रहेंगे, लेकिन नया कोई काम नहीं करवाया जा सकेगा। विभाग का तर्क है कि 31 दिसंबर 2022 तक राशि के उपयोग की समय सीमा तय की गई थी, जबकि पंचायत हल्कों के नुमाइंदों का कहना है कि केंद्र सरकार की ओर से यह राशि खर्च करने की सीमा 31 मार्च 2023 तक तय की गई थी।
राशि के उपयोग के रोक के आदेश का प्रदेशभर में विरोध शुरू हो गया है। ग्रामीण विकास व पंचायती राज विभाग की आयुक्त सचिव मंदीप कौर की ओर से जारी आदेश में हल्का पंचायत\ब्लाक कार्यालय\जिला पंचायत कार्यालय में 14वें वित्त आयोग अवार्ड के तहत आई राशि के उपयोग पर तत्काल प्रभाव पर रोक लगा दी गई है।
आदेश के तहत प्रत्येक ब्लाक विकास अधिकारी को सुनिश्चित करना होगा कि पंचायत वार पंचायत अकाउंट असिस्टेंट द्वारा हस्ताक्षर और पंचायत सचिव द्वारा काउंटर हस्ताक्षर ब्योरा सहायक आयुक्त पंचायत (एसीपी) प्रमाणपत्र जमा करवाएंगे।
वहीं, आल जेएंडके पंचायत कान्फ्रेंस के अध्यक्ष अनिल शर्मा ने कहा कि केंद्र सरकार ने उक्त वित्त आयोग की राशि को 31 मार्च 2023 तक खर्च करने का आदेश दिया था, लेकिन इन्होंने जबरन उसे निर्धारित से ढाई माह पहले ही फ्रीज कर दिया गया।
उन्होंने आरोप लगाया कि जिस राशि को फ्रीज किया गया है उसे कमीशन वाले स्थानों पर लगाया जाएगा, जबकि इससे पंचायतों का विकास रुक जाएगा। प्रदेश का 75 प्रतिशत हिस्सा पहाड़ी इलाका है और पहाड़ी पंचायतों में बर्फबारी के कारण मौजूदा कार्य करवाना संभव नहीं था।
फरवरी में उक्त पंचायतों में काम शुरू करवाया जाना था। लेकिन राशि का उपयोग बंद कर देने से अब उक्त पंचायतों में नए काम नहीं करवाए जा सकेंगे। इस आदेश के खिलाफ प्रदेशभर में आंदोलन तेज किया जाएगा। विभाग के एक जेई के पास 20 से 30 पंचायतें हैं।
विभागीय स्टाफ की कमी के कारण पहले निर्माण कार्य नहीं हो सके। वित्त आयोग की राशि का उपयोग न करने के लिए पूरी तरह से विभागीय कार्यप्रणाली जिम्मेदार है। अगर राशि समय पर खर्च की जाती तो प्रदेश की पंचायतों की तस्वीर बदल जाती।