जम्मू। घाटी में गैर कश्मीरियों को निशाना बनाए जाने के पीछे पाकिस्तान के आईएसआई हैंडलरों का गेम प्लान बताया जा रहा है। 370 हटने के बाद हालात बदलने और कश्मीर में शांति के सरकारी दावे को खोखला साबित करने के लिए यह साजिश रची गई है। साजिश यह भी है कि यहां अगले कुछ साल में 50 हजार करोड़ रुपये के निवेश के दावे को भी झटका देकर आम कश्मीरियों को रोजगार से दूर रखा जाए ताकि यहां अमन व शांति बहाल न हो सके।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व डीजीपी डॉ. एसपी वैद कहते हैं कि इन सब घटनाओं के पीछे आईएसआई के हैंडलर हैं। 370 हटने के बाद पिछले कुछ समय से घाटी में गतिविधियां बढ़ी हैं। सरकार कश्मीरी पंडितों को उनकी संपत्तियां लौटाने की दिशा में प्रयास कर रही हैं। इससे दोबारा घाटी में हिंदुओं के लौटने का खतरा सीमापार के लोगों को डराने लगा है। वे कभी भी मिश्रित संस्कृति नहीं चाहते हैं। इस वजह से बाहरी लोगों और अल्पसंख्यकों को निशाना बनाया जा रहा है। दूसरा इन सब घटनाओं के जरिये ही वे दोबारा से आतंकी रैंक को पुनजीर्वित करने की भी कोशिश कर रहे हैं क्योंकि पिछले कुछ समय में सुरक्षा बलों ने सभी तंजीमों के सरगनाओं का खात्मा कर दिया है। तीसरा सरकार के हालात बेहतर होने के दावे को चुनौती देना भी एक मकसद है। वे नहीं चाहते कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर यह बात प्रचारित हो कि जम्मू-कश्मीर में 370 हटने के बाद से शांति है। विकास को बल दिया जा रहा है।
दरअसल गैर कश्मीरियों को घाटी आने से रोकने के लिए घाटी में टारगेट किलिंग का खेल पाकिस्तान के इशारे पर खेला जा रहा है। अनुच्छेद 370 हटने के बाद यहां चल रहे विकास कार्यों को झटका पहुंच सके। घाटी में टारगेट किलिंग के तहत अब तक छह लोगों को आतंकियों ने मारा है। इनमें बिहार के दो गोलगप्पे वाले ओर उत्तर प्रदेश का एक कारपेंटर शामिल है। एक कश्मीरी पंडित दवा कारोबारी, एक महिला सिख शिक्षक और एक जम्मू निवासी शिक्षक भी मारे गए हैं। कश्मीर मामलों के जानकार बताते हैं कि ये सब ऐसे लोग हैं जिनका न तो आतंकवाद और न ही आतंकियों से कोई नाता रिश्ता रहा है। न ही ये सुरक्षा बलों को जानते-समझते हैं। प्रवासी तो रोजी-रोजगार के चक्कर में घाटी का रुख किए हैं। ज्यादातर दक्ष मजदूर चाहे कारपेंटर हों या फिर पेंट करने वाले, चाहे मजदूर हों या अन्य दक्ष कार्य करने वाले, सब गैर कश्मीरी हैं। अनुच्छेद 370 हटने के बाद भी आतंकियों ने तीन ट्रक चालकों को जिंदा जला दिया था। यह सब केवल अपनी उपस्थिति जताने और डर पैदा करने के लिए आतंकियों ने किया था।
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खौफजदा प्रवासी लौटने लगे
घाटी में गैर कश्मीरियों को निशाना बनाए जाने से खौफजदा प्रवासी मजदूरों और दिहाड़ीदारों का घाटी से लौटने का सिलसिला शुरू हो गया है। श्रीनगर के साथ ही दक्षिणी कश्मीर के अनंतनाग व पुलवामा से कुछ दिहाड़ीदारों की बिहार, उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ में वापसी हो गई है।