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Election: भाजपा-पीडीपी पर 2014 दोहराने की चुनौती, नेकां-कांग्रेस पर ग्राफ सुधारने का दबाव; सभी दलों की परीक्षा

Mon, 19 Aug 2024 02:19 PM IST
शाहरुख खान डॉ. बृजेश कुमार सिंह, अमर उजाला, जम्मू

सार

जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव की सरगर्मियां तेज हो गई हैं। भाजपा-पीडीपी पर 2014 दोहराने की चुनौती होगी। नेकां-कांग्रेस पर सुधार करने का दबाव होगा।
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assembly election - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव की घोषणा होने के साथ केंद्र शासित प्रदेश में सभी राजनीितक दल अपनी तैयारियों में जुट गए हैं। इस चुनाव मे जहां भाजपा व पीडीपी के लिए 2014 के इतिहास को दोहराने की चुनौती होगी, वहीं, नेकां और कांग्रेस पर पिछले प्रदर्शन को सुधारने का दबाव होगा।
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आतंकवाद के प्रचंड स्तर पर पहुंचने के बाद जम्मू-कश्मीर में 1996 में सबसे पहला विधानसभा चुनाव हुआ। इसके बाद 2014 तक तीन और विधानसभा चुनाव हुए। 2014 में भयंकर बाढ़ की विभीषिका के बाद हुए आखिरी विधानसभा चुनाव में भाजपा किंगमेकर के रूप में उभरी। 

पार्टी ने जम्मू संभाग से 25 सीटें झटकते हुए पीडीपी के बाद सबसे अधिक सीटें अपनी झोली में डाली। पीडीपी 28 सीटों के साथ नंबर एक पर रही। हालांकि, भाजपा को मिले मत प्रतिशत सभी पार्टियों से अधिक रहा। इस चुनाव में नेकां और कांग्रेस को काफी नुकसान उठाना पड़ा और उसके हाथ से सत्ता निकल गई। 
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भाजपा और पीडीपी ने मिलकर 2015 में सरकार बनाई। लेकिन गठबंधन की यह सरकार तीन साल ही चल पाई और 2018 में गिर गई। जम्मू-कश्मीर के आखिरी विधानसभा चुनाव 2014 के परिणामों पर सीटों के आधार पर नजर डाली जाए तो भाजपा की झोली में 37 में 25 सीटें आईं। 

शेष 12 सीटों में कांग्रेस को छह, नेकां को तीन, पीडीपी को दो व एक निर्दल को जीत मिली। इसी प्रकार कश्मीर की 50 (लद्दाख की चार सीटों को मिलाकर) सीटों में पीडीपी को 26 सीटें मिलीं। शेष 24 सीटों में नेकां को 12, कांग्रेस को छह, निर्दल को छह सीटें मिलीं। भाजपा के हाथ एक भी सीट नहीं आई। 

 

इसलिए जम्मू संभाग में भाजपा को पिछले प्रदर्शन दोहराने की चुनौती होगी। ज्ञात हो कि विधानसभा में लद्दाख की चार सीटों को मिलाकर 87 सीटें थीं। अनुच्छेद 370 हटने के बाद लद्दाख को बिना विधानसभा के केंद्र शासित प्रदेश बना दिया गया है।

इसके बाद यहां विस सीटों की संख्या 83 रह गई। परिसीमन के बाद सीटें बढ़कर 90 हो गई। इनमें जम्मू में छह सीटें बढ़ाकर 43 और कश्मीर में एक सीट बढ़ाकर 47 करने के साथ ही सत्ता संतुलन बनाने की कोशिश की गई।

भाजपा समेत सभी दलों के लिए परीक्षा की घड़ी
राजनीतिक विश्लेषक प्रो. हरि ओम का कहना है कि 2014 के प्रदर्शन को दोहराने की भाजपा के सामने जबर्दस्त चुनौती होगी। जम्मू के लोगों ने जो विश्वास जताया था उस पर भाजपा को दोबारा खरा उतरना होगा। लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव के प्रदर्शन को भी याद रखना होगा जिसमें भाजपा का मत प्रतिशत 20 फीसदी तक गिर गया था।

नए जम्मू-कश्मीर में अपनी पार्टी और डेमोक्रेटिक प्रोगेसिव आजाद पार्टी (डीपीएपी) जैसे नए दल भी अस्तित्व में आए हैं। परिस्थितियां बदली हैं। ऐसे में दस साल बाद हो रहे विधानसभा चुनाव सभी के लिए परीक्षा की घड़ी होगी।

पिछले 6 चुनावों में मिली सीटें
वर्ष      कांग्रेस     भाजपा     नेकां     पीडीपी
1983     26     00     46     00
1987     26    02    40  00
1996     07     08     57  00
2002     20     01     28     16
2008     17     11    28     15
2014     12     25     15   28
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पिछले आठ चुनावों में दलगत मत प्रतिशत
पार्टी      1983      1987      1996      2002      2008      2014      2019     2024
कांग्रेस      30.32      20.20      20.00      24.24      17.71      18.00      28.38      19.38
भाजपा      03.19      05.10      12.13      08.57      12.45      23.00      46.49      24.36
नेकां      47.29      32.98      34.78      28.24      23.07      20.80      7.87      22.30
पीडीपी      00 00 00      09.28      15.39      22.70      3.38      8.48





 
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