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Jammu Election: भाजपा की सोशल इंजीनियरिंग की भी होगी परीक्षा, कठुआ की इन सीटों पर गेम जेंचर हैं ये बिरादरियां

Sun, 06 Oct 2024 02:24 PM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू

सार

चुनाव परिणाम से आरक्षण कार्ड के साथ भाजपा की सोशल इंजीनियरिंग की भी परीक्षा होगी। चुनाव से पहले पहाड़ी समुदाय की चार जातियों को 10 फीसदी आरक्षण दिया। इतना ही गुज्जर-बकरवाल समुदाय को दिया गया। पहाड़ी नेताओं को दूसरे दलों से बुलाकर टिकट दी।
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jammu election - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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विधानसभा चुनाव परिणाम भाजपा की सोशल इंजीनियरिंग की भी परीक्षा होंगे। विरोध के बाद भी भाजपा ने पहाड़ी समुदाय को 10 फीसदी आरक्षण दिया। इनकी आबादी जम्मू-कश्मीर संभाग में करीब दस लाख मानी जाती है। इसी समुदाय से जुड़े दूसरे दलों के नेताओं को भी भाजपा में शामिल कर टिकट दी है। 
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इसमें पहाड़ी नेता सैयद मुश्ताक बुखारी और गुज्जर समुदाय के चौधरी जुल्फिकार को चुनाव लड़ाया। वहीं संतुलन बनाने के लिए पहाड़ी समुदाय के रविंद्र रैना को नौशेरा विधानसभा क्षेत्र से चुनाव मैदान में उतारा तो सत्यपाल शर्मा को कार्यकारी अध्यक्ष घोषित कर दिया। 

यह भी भाजपा का किसी राज्य में चुनाव के दौरान अलग तरह का प्रयोग था। यह दोनों ही नेता ब्राह्मण समुदाय से हैं। आंकड़ों के मुताबिक जम्मू-कश्मीर में पहाड़ी समुदाय की आबादी करीब 12 लाख है। एक समय में यह नेकां का वोटबैंक माना जाता रहा है। 
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इनका प्रभाव राजोरी, हंदवाड़ा, अनंतनाग पीर-पंजाल, पुंछ और बारामुला इलाकों में है। यह इस क्षेत्र की करीब 15 सीटों पर जीत-हार तय करते हैं। पहाड़ी समुदाय पिछले कई साल से आरक्षण की मांग करता रहा है। 
 

इनकी इस मांग का विरोध गुज्जर-बकरवाल समाज करता रहा लेकिन भाजपा ने दोनों को साधते हुए पहाड़ी समुदाय की चार जातियों पहाड़ी एथनिक ग्रुप, पाडरी, कोली और गद्दा ब्राह्मण को एसटी में शामिल किया था। 
 

ऐसे में अब भाजपा यह मानकर चल रही है कि वह इनके सहारे कश्मीर में खाता खोलने में सफल रहेगी। वहीं गुज्जर-बकरवाल की आबादी भी करीब 18 लाख से अधिक मानी जाती है। इन्हें इस चुनाव से पहले सीटों में आरक्षण प्राप्त नहीं था। 
 

परिसीमन के बाद राज्य की नौ सीटें अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित कर दी गईं। ऐसे में इस समाज का विधानसभा पहुंचना हर हाल में तय हो गया। इसे भी भाजपा के पक्ष में देखा जा रहा है लेकिन परिणाम में इनका लाभ भाजपा को कितना मिलेगा यह देखना दिलचस्प होगा।

सांबा, उधमपुर व कठुआ की 13 में 12 सीटों पर लड़ती पार्टियां हैं, फैसला करती हैं बिरादरियां
जम्मू संभाग के सांबा, उधमपुर और कठुआ की 13 में 12 सीटों पर भी बिरादरियों का सिक्का चलता है। यहां लड़ती तो पार्टियां हैं, लेकिन जीत-हार का फैसला बिरादरियां करती हैं। राजपूत, ब्राह्मण, जट्ट, महाशा और बटवाल मतदाता यहां निर्णायक रहते हैं। 
 

सांबा सीट पर 60 फीसदी संख्या बल वाले राजपूतों का दबदबा है। उधमपुर की ईस्ट, वेस्ट सीट पर 70 फीसदी राजपूत, ब्राह्मण और महाजन भारी हैं। दोनों सीटों पर सभी पार्टियों ने इन्हीं जातियों के चेहरे उतारे हैं। पहले आरक्षित रही चिनैनी सीट पर राजपूत और महाजन मिलकर जीत का फैसला करते हैं। दोनों यहां 50 फीसदी के करीब हैं।
 

कठुआ की इन सीटों पर गेम जेंचर हैं ये बिरादरियां
जिला कठुआ में छह विधासभा सीट हैं। इन सभी पर राजपूत, ब्राह्मण, एससी, मुसिलम, गद्दी किसी भी प्रत्याशी की हार और जीत में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। कठुआ शहरी सीट की बात करें, तो यहां पर राजपूत और एससी वोट दोनों का बराबर आधार है। जसरोटा में राजपूत बिरादरी का वोट लगभग 50 फीसदी से ज्यादा है। बनी विस क्षेत्र में ठाकुर और गद्दी बिरादरी का 55 फीसदी से ज्यादा वोट उम्मीदवार की नैया को पार लगाता है। बसोहली में ठाकुर बिरादरी का बोलबाला है। बिलावर में मुस्लिम और हीरानगर बार्डर बेल्ट में ब्राह्मण जीत-हार तय करेंगे।
 
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सांबा में राजपूत तो विजयपुर में ब्राह्मण भारी
सांबा विधानसभा क्षेत्र में 50 फीसदी से ज्यादा वोट राजपूत बिरादरी का है। जिले की अन्य सीट रामगढ़ में 27000 के करीब जट्ट वोट है। यहां 25 हजार के करीब भगत बिरादरी और 24 हजार के करीब ब्राह्मण बिरादरी का मतदाता है। विजयपुर सीट पर ब्राह्मण मतदाता निर्णायक रहता है। यहां ब्राह्मण वोट करीब-करीब 40 फीसदी हैं।

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