इससे पहले एएनसी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष मुजफ्फर शाह ने कहा था कि उनकी पार्टी को कानूनी और संवैधानिक विशेषज्ञों ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला खामियों से भरा था। यह कई बुनियादी मुद्दों पर चुप रहा। एक समीक्षा याचिका तैयार की जा रही है और एक बार यह तैयार हो जाने पर, हम इसे अपनी कानूनी टीमों और 23 याचिकाकर्ताओं के सामने रखेंगे और फिर शीर्ष अदालत में फिर याचिका दायर करेंगे। उन्होंने कहा कि यह चर्चा का विषय है कि कानूनी कार्रवाई का स्वरूप क्या होगा।
केंद्र ने 5 अगस्त, 2019 को अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त कर दिया और पूर्ववर्ती जम्मू-कश्मीर राज्य को केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित कर दिया। शीर्ष अदालत ने इस महीने की शुरुआत में इस फैसले को बरकरार रखा।