पर्यटन विभाग की उदासीनता धार्मिक स्थलों तक पहुंचने में श्रद्धालुओं का रास्ता रोक रही है। महाजन सभा से 20 कदम दूर श्री रणवीरेश्वर मंदिर में दूसरे राज्यों से आए शिवभक्त नहीं पहुंच पा रहे। सूचना पट न होने से उनके लिए आस्था का द्वार बंद है। अमरनाथ यात्रियों के ठहराव के लिए बनाए गए आधार शिविरों के निकट कई धर्मस्थल होने के बावजूद उन्हें सटीक जानकारी नहीं मिल पा रही।
महाजन सभा, सरस्वती धाम, पंचायत भवन, श्रीराम मंदिर और गीता भवन में पंजीकरण करवाने के बाद अमरनाथ यात्री और साधु-संत खाली समय हाल में ही भजन-कीर्तन कर बिता रहे हैं। अगर पर्यटन विभाग मंदिरों के शहर का रास्ता दिखाए तो पर्यटन बढ़ने के साथ-साथ स्थानीय कारोबार को भी पंख लगेंगे।
धर्मस्थलों तक पहुंचने के लिए सूचना पट लगाने की जरूरत : श्री अमरनाथ यात्रा पर राजस्थान से आए रितेश ने कहा कि वह पहली बार अमरनाथ यात्रा पर आए हैं। उन्होंने श्री अमरनाथ और माता वैष्णो देवी कटड़ा के बारे में ही सुना था। जम्मू शहर के मंदिरों के बारे में जानकारी नहीं थी।
पंजीकरण करवाकर जब वह महाजन सभा से बाहर निकले तो रोड पर चलते थोड़ी दूर मंदिर दिखा। बाहर लोग फूल बेच रहे थे। पूछा तो मंदिर के इतिहास के बारे में पता चला, तब जाकर दर्शन किए। उत्तरप्रदेश से जत्थे के साथ आए अमरनाथ यात्री प्रभात, सूर्य, मोनिका और अन्य ने बताया कि उन्हें जम्मू के मंदिरों के बारे में जानकारी नहीं थी।
चूंकि पहले कभी यात्रा नहीं की। शालामार रोड पर एक दुकानदार ने उन्हें बावे वाली माता, रघुनाथ मंदिर, श्री रणवीरेश्वर मंदिर और अन्य धर्मस्थलों के बारे में बताया। प्रशासन को यात्रियों की जानकारी के लिए धार्मिक स्थलों के साइन बोर्ड लगाने चाहिए।
पर्यटन विभाग की जिम्मेदारी है कि पंजीकृत स्थलों के बाहर सूचना पट लगाए। उस पर मंदिरों के रूट और किलोमीटर के बारे में जानकारी दी जाए। जिस तरह शहर में यात्रियों के स्वागत के लिए बड़े-बड़े बोर्ड लगाए गए हैं, उसी तरह आधार शिविरों के बाहर विभाग धर्मस्थलों से जुड़ी जानकारी के साइनेज लगाए, ताकि बाहर से आने वाले यात्रियों को इन तक पहुंचने में आसानी हो।
- रमेश चंद्र गुप्ता, अध्यक्ष, महाजन सभा