बता दें, नब्बे के दशक से पहले जन्नत कहा जाने वाला कश्मीर भारतीय फिल्म इंडस्ट्री का सबसे पसंदीदा स्थल था। कश्मीर की हसीन वादियां हर निर्माता निर्देशक और अभिनेता को अपनी तरफ खींच लेती थीं। बॉबी, कश्मीर की कली, आप की कसम, कभी कभी, रोटी, बेताब, जंगली जैसी सुपरहिट फिल्में 1990 से पहले कश्मीर में शूट हुईं। लेकिन इसके बाद कश्मीर में आतंकवाद ने ऐसे पैर पसारे की बालीवुड ने कश्मीर से दूरी बना ली। लेकिन अब फिर से कश्मीर की फिजाओं में लाइट कैमरा एक्शन की गूंज सुनाई देने लगी है।
शूटिंग के लिए सब्सिडी, फिल्म पॉलिसी बनी संजीवनी
फिल्म नीति फिल्म निर्माताओं को अपनी फिल्मों की शूटिंग के लिए कश्मीर को चुनने के लिए आकर्षित करने में उत्प्रेरक साबित हुई है। पिछले दो वर्षों के दौरान कई फिल्म निर्माताओं को कश्मीर में फिल्मों और वेब सीरीज की शूटिंग की अनुमति मिली है।
करीब 700 निर्माताओं ने अनुमति मांगी और 300 को अनुमति दी गई। सरकार ने प्रमुख फिल्म स्थलों के रूप में प्रचारित करने के लिए कुछ नए स्थलों का अनावरण किया है। फिल्म नीति 2021 में परिकल्पित सब्सिडी के वितरण के लिए सूचना विभाग में एक फिल्म विकास कोष (एफडीएफ) भी बनाया गया है।
परेशानी मुक्त शूटिंग की सुविधा के लिए जम्मू-कश्मीर फिल्म विकास परिषद द्वारा एकल-खिड़की तंत्र शुरू किया गया है। फिल्म निर्माता jkfilm.jk.gov.in पर ऑनलाइन आवेदन कर रहे हैं। शूटिंग के लिए सब्सिडी की पेशकश की है। -अफाक गददा, नोडल अधिकारी, फिल्म पालिसी
कश्मीर की फिल्मों से बने सुपर स्टार
जंगली, जब जब फूल खिले, कश्मीर की कली, कभी कभी, आप की कसम, बाबी, सिलसिला, बेताब, रोजा, लम्हे, राकस्टार, बजरंगी भाईजान जैसे वो फिल्में हैं, जिन्होंने 1960 से लेकर 2024 तक राजेश खन्ना, अमिताभ बच्चन, शशिकपूर, शम्मी कपूर, राजिंदर कुमार, शाहरुख खान, सलमान खान, आमिर खान को सुपरस्टार बनाया।
शूटिंग के पसंदीदा स्थल, जहां और ढांचा विकसित करने की जरूरत
कश्मीर का पहलगाम, गुलमर्ग, अनंतनाग, सोनमर्ग, डल झील जैसे पर्यटन स्थल हैं। जिनकी खूबसूरत वादियों में बालीवुड फिल्मों की शूटिंग की गई है, लेकिन आतंकवाद के दौर के बाद इन जगहों पर काफी नुकसान हुआ। पिछले कुछ समय से इन जगहों पर बुनियादी ढांचा विकसित करने का प्रयास किया गया है। लेकिन अभी भी ढांचा विकसित करने की जरूरत है। फिल्मी पालिसी में निर्माताओं को ढांचा विकसित करके देने का प्रावधान भी है।
प्रदेश के उप राज्यपाल मनोज सिन्हा कहते हैं कि जिस क्षण प्यार एक रिश्ता बन जाता है, यह बंधन को मजबूत करता है। फिल्म नीति वह बंधन है, जो भारतीय सिनेमा में जम्मू-कश्मीर के अतुल्य गौरव को पुनर्जीवित करेगी। यह नीति एक नवोन्वेषी और प्रतिस्पर्धी उद्योग को बढ़ावा देने के लिए डिज़ाइन की गई है, जो ओटीटी प्लेटफार्मों के आगमन के बाद से तेजी से विकसित हो रहा है।
जम्मू-कश्मीर, रहस्यवादी सौंदर्य और आश्चर्यजनक परिदृश्य की भूमि, फास्ट ट्रैक सिंगल विंडो सिस्टम, प्रोत्साहन, भविष्य-उन्मुख सुविधाओं और सबसे ऊपर तकनीकी को पूरा करने के लिए सार्वजनिक-निजी सहयोग के साथ एक फिल्म हब के साथ दुनिया में सबसे अच्छी और प्रगतिशील नीतियों में से एक प्रदान करती है।